Representative image
आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) की बदौलत साल 2035 तक भारतीय दवा कंपनियों के लाभ मार्जिन में 3 से 4 प्रतिशत अंकों का इजाफा हो सकता है। बर्नस्टीन की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह क्षेत्र अनुसंधान और विकास (आरऐंडडी), विनिर्माण, गुणवत्ता प्रणालियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में इस तकनीक का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है।
भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विश्लेषण शुरू करते हुए ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि भारतीय बायोफार्मा ‘नवाचार शक्ति वाले दशक’ में प्रवेश कर रहा है। उसके अनुसार वैश्विक दवा कंपनियों के नए मोलिक्यूल मॉडल को दोहराने का प्रयास करने के बजाय वह विशेष दवाओं और निरंतर नवाचार के जरिये मूल्य सृजित करने के लिहाज से बेहतर स्थिति में है।
बर्नस्टीन ने कहा, ‘हमारे स्वामित्व वाले मॉडल ने भारतीय फार्मा करोबार में आरऐंडडी, विनिर्माण परिचालन और गुणवत्ता तथा फील्ड फोर्स जैसे विभिन्न कार्यों में एआई इस्तेमाल के मामलों का अनुकरण किया।’ बर्नस्टीन ने कहा, ‘हमारा अनुमान है कि साल 2035 तक एआई अपनाने से इस क्षेत्र के शुद्ध लाभ में 3 से 4 प्रतिशत अंकों की वृद्धि होगी।’
ब्रोकरेज कंपनी का अनुमान है कि एआई से होने वाले लाभ मेंआरऐंडडी और विनिर्माण परिचालन की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत हो सकती है।
बर्नस्टीन का तर्क है कि भारतीय दवा क्षेत्र की वृद्धि का अगला चरण रेनमेकर्स से आगे बढ़ेगा यानी ऐसे खास तथा ज्यादा प्रतिफल देने वाले नवाचार के मौके, जिनसे अच्छी-खासी कमाई हो सके और जिनके लिए नई दवाएं खोजने में लगने वाले भारी-भरकम निवेश की जरूरत न पड़े।