जगुआर-लैंड रोवर से लेकर सिंगुर तक सुर्खियों में रहने वाली कंपनी टाटा मोटर्स लिमिटेड इस हफ्ते भी लगातार सुर्खियों में रही।
सबसे पहले कंपनी ने अपने भारी भरकम राइट्स इश्यू को रद्द करने का ऐलान कर दिया, तो शुक्रवार को सिंगुर से हटने की रतन टाटा की धमकी कारोबारी जगत और राजनीतिक हलके में गूंजती रही।
राइट्स इश्यू रद्द करने का तो शेयर बाजार पर भी अच्छा असर पड़ा और बाजार डूबने के बावजूद कंपनी के शेयर उछल गए। बुधवार को राइट्स इश्यू रद्द होने का ऐलान हुआ और गुरुवार को बाजार खुलते ही कंपनी के शेयर उछल गए। शेयर 3.9 फीसद चढ़कर 440.50 रुपये तक पहुंच गए।
यह बात दीगर है कि पूरा बाजार डूबा और दिन का कारोबार खत्म होने पर कंपनी के शेयर भी गिर गए। लेकिन इसकी वजह टाटा का ही दूसरा ऐलान रहा। इसके तहत कंपनी ने अपने कुछ निवेश बेचने की बात कही। दरअसल टाटा मोटर्स ने जगुआर-लैंड रोवर के अधिग्रहण के लिए जो ऋण लिया था, उसी की भरपाई के लिए वह राइट्स इश्यू लाने की योजना बना रही थी। उसके राइट्स इश्यू का आकार भी कोई छोटा मोटा नहीं था।
इसके जरिये कंपनी की योजना तकरीबन 3,000 करोड़ रुपये जुटाने की थी। लेकिन बाजार की खस्ता हालत और कई कंपनियों के आईपीओ को दुम दबाकर भागते देखकर टाटा मोटर्स ने मौके पर अपना इरादा बदल दिया। उसने कहा कि अब वह अगले छह से आठ महीनों के भीतर बाजार कीमत पर अपने कुछ निवेशों का विनिवेश कर यानी चरणबद्ध तरीके से उन्हें बेचकर जरूरी रकम का इंतजाम करेगी।
अलबत्ता टाटा मोटर्स ने यह नहीं बताया कि विनिवेश का उसका तरीका क्या होगा और किन निवेशों को बेचने की उसकी योजना है। उसने यह भी कहा कि लगभग 4,200 करोड़ रुपये जुटाने के लिए दो अन्य राइट्स इश्यू लाने की उसकी जो योजना है, उसमें कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि मई में कंपनी ने कहा था कि लैंडरोवर-जगुआर के लिए रकम जुटाने के वास्ते वह एक ही वक्त पर तीन राइट्स इश्यू लाएगी।
इनके जरिये कुल 7,200 करोड़ रुपये उगाहे जाएंगे। शेयर गिरने की वजह भी यही थी। निवेशकों को यह पता नहीं चला कि कौन-कौन से निवेश बेचे जाएंगे और इसी कारण हड़बड़ी में टाटा मोटर्स के शेयरों की ज्यादा बिकवाली हुई। नतीजा सेंसेक्स की कतार में शेयर बैठ गए।
जहां तक नई योजना का सवाल है, तो तमाम जानकार इसे बेहतर बता रहे हैं। उनका कहना है कि इक्विटी कम होने के आसार अब कम हैं और इसी वजह से शेयरों की सेहत भी नई योजना से कुछ सुधर ही सकती है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि वाहन उद्योग की मंदी की वजह से कंपनी के लिए आने वाले दिनों में राह पथरीली ही है।
टाटा मोटर्स का बहीखाता वैसे भी ब्याज दर की मार से गड़बड़ा रहा है। समूचे वाहन उद्योग में जो मंदी आई है, यह कंपनी भी उससे बेअसर नहीं है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने 6928.44 करोड़ रुपये की बिक्री की, जबकि उसका शुद्ध मुनाफा 326.11 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसने 699.02 करोड़ रुपये की बिक्री की थी और उसका शुद्ध मुनाफा 466.76 करोड़ रुपये थी।