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शिपिंग उद्योग को पैसे की दरकार, तलाश रहा है नए विकल्प

Last Updated- December 07, 2022 | 7:01 PM IST

शिपिंग उद्योग को अपने पुराने जहाजों के बदले नए जहाज लेने के लिए साल 2012 तक लगभग 80,000 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ेगा। इसके लिए उद्योग रकम जुटाने के नए विकल्प तलाश रहा है।


उद्योग एक शिपिंग ट्रस्ट की स्थापना, परिवर्तनीय बांड जारी करना जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। जर्मनी में इस तरह के मॉडल का परीक्षण चल रहा है। पिछले साल आईसीआईसीआई बैंक के प्रबंध निदेशक के वी कामत और शिपिंग उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में सिंगापुर, जर्मनी में रकम जुटाने के अन्य विकल्पों को मान्यता दी गई है।

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एस हजारा ने कहा, ‘हालांकि इस उद्योग में 100 फीसदी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति है। लेकिन अभी तक किसी भी जहाज के अधिग्रहण में तो इसके जरिए कोई निवेश नहीं हुआ है।’

उन्होंने कहा, ‘जब तक हम निवेशकों को करों में छूट जैसी रियायतें नहीं देंगे तब तक शिपिंग उद्योग का विकास होना संभव नहीं है। इसीलिए रकम जुटाने के अन्य विकल्पों की तलाश करना बहुत जरूरी है।’ दरअसल शिपिंग कारोबार एक चक्रीय कारोबार है जिसमें काफी बड़ा निवेश करना पड़ता है और इसका फायदा कंपनी को काफी समय बाद मिलता है।

कंपनियों को अपने बेड़े का विस्तार करने के लिए रकम जुटाना में काफी मुश्किल हो रही है। इस कारण इन कंपनियों को आंतरिक संसाधनों या फिर बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर कर्ज के लिए निर्भर रहना पड़ता है। इसके लिए कंपनियों को ऐसे विकल्पों पर ध्यान देना होगा, जिससे निवेशकों को इस कारोबार में निवेश करने के लिए रियायत भी मिल सके।

सिंगापुर में शिपिंग ट्रस्ट को काफी पसंद किया जा रहा है। इसकी मदद से शिपिंग कंपनियां जहाज खरीदने के लिए कर्ज ले सकती हैं। ट्रस्ट को कोई भी प्रायोजक कंपनी बना सकती है। ट्रस्ट के जरिए खरीदे गए जहाजों को शिपिंग कंपनियों को किराए पर दिया जाता है।

भारतीय शिपिंग कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक शिपिंग ट्रस्ट कंपनियों को नए जहाज खरीदने के लिए रकम मुहैया कराएगी। इसी तरह जर्मनी की के जी शिप फाइनैंसिग कंपनी जहाज खरीदकर कंपनियों को किराए पर देती है। इस तरह शिपिंग कंपनियों को नए जहाजों के लिए कम किराया देना पड़ता है। शिपिंग कंपनियों का कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो उनका बहीखाता सुधर जाएगा।

फिलहाल इन फैसलों पर इंडियन नैशनल शिपऑनर्स एसोसिएशन (आईएनसीए) विचार कर रही है और जल्द ही जहाजरानी मंत्रालय के पास अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेगी। अंतरराष्ट्रीय सामुद्रिक संगठन (आईएमओ) के नियमकों के अनुसार साल 2012 तक भारतीय शिपिंग उद्योग को अपने बेड़े में से लगभग 44 फीसदी जहाजों के बदले नए जहाज लेने पड़ेंगे। आईएमओ के नियमों के मुताबिक साल 2010 तक हल टैंकर के स्थान पर दो हल टैंकर वाले जहाज लेने पड़ेंगे। इसके अलावा 25 साल पुराने सभी जहाजों को भी बेड़े से हटाना पड़ेगा।

First Published - August 27, 2008 | 11:40 PM IST

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