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सिडबी एमएफआई का कायाकल्प करेगा

Last Updated- December 07, 2022 | 8:04 PM IST

उत्तर प्रदेश, बिहार और देश के उत्तर पूर्वी राज्यों में लघु वित्तीय प्रयासों की दशा सुधारने के लिए भारतीय उद्योग एवं विकास बैंक (सिडबी) विभिन्न योजनाएं बना रहा है।


दक्षिण के राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर रहे लघु वित्त संस्थानों (एमएफआई) के अब उत्तरी राज्यों में गठन और उनके परिचालन की योजना बैंक बना रहा है। इस मॉडल को शहरों में लोकप्रिय बनाने की तैयारी की जा रही है।

सिडबी के उप प्रबंध निदेशक बसंत सेठ ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘दक्षिण में एमएफआई काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। यह मॉडल दक्षिण के राज्यों में काफी कारगर रहा है और इसने कई लोगों को वित्तीय सहायता मुहैया कराई है।’

सेठ ने बताया कि लघु वित्त की आवश्यकता केवल ग्रामीण इलाकों में ही नहीं होती है। शहरों में भी एक बहुत बड़ी आबादी को छोटे ऋणों की जरूरत होती है। हमारा प्रयास है कि लोगों की इसी मांग को पूरा किया जा सके।

मौजूदा समय में सिडबी देश भर में 112 से अधिक एमएफआई का परिचालन कर रहा है और अनुमान है कि लघु वित्त के तहत 1,000 करोड़ रुपये लगाए गए हैं। जहां देश में इतने सारे एमएफआई हैं वहीं उत्तर प्रदेश के खाते में महज 15 फीसदी संस्थान ही हैं।

सेठ ने कहा, ‘यूपी में लघु वित्त योजना के रूप में 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार की क्षमता है। अब भी राज्य में क्षमता से कमतर का कारोबार चल रहा है।’ उन्होंने कहा कि बैंक चाहता है कि जल्द से जल्द इस क्षमता का इस्तेमाल किया जा सके। इस वर्ष के अंत तक सिडबी की योजना उत्तर प्रदेश की 15 फीसदी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 30 फीसदी तक ले जाने की है।

उत्तर प्रदेश में ऋण की अदायगी करने का इतिहास कैसा रहा हे यह पूछे जाने पर सेठ ने कहा कि राज्य में ऋण की वापसी का रिकॉर्ड शानदार रहा है। उन्होंने कहा कि लघु वित्त के तहत छोटे लेनदारों से भी समय पर ऋण की वापसी की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘राज्य में गरीबों को जितना भी ऋण दिया गया है उनसे वापसी का रिकार्ड 99 फीसदी रहा है।’ लघु वित्त योजना के तहत सिडबी 12 से 18 महीनों के लिए अधिकतम 50,000 रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराता है।

First Published - September 7, 2008 | 9:39 PM IST

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