कानपुर में लघु एवं मझोले उद्यम (एसएमई) के विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के तहत स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) एक लेदर क्लस्टर के विकास के लिए आगे आया है।
बैंक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर (आईआईटी-के) के सहयोग से चमड़ा उत्पादों के लिए एक जांच प्रयोगशाला विकसित किए जाने पर भी विचार कर रहा है। यह बैंक शहर में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत एक कॉमन एफल्युएंट संयंत्र के निर्माण की योजना पर भी काम कर रहा है।
सिडबी इस परियोजना में भागीदारी के लिए कानपुर लेदर एसोसिएशन और एक और निजी कंपनी के साथ बाचतीत भी शुरू कर चुका है। कानपुर लंबे समय से चमड़ा निर्माताओं का गढ़ रहा है और यह शहर चमड़ा, फुटवियर आदि के लिए प्रख्यात रहा है। यहां चलने वाले अधिकांश उद्योग लघु एवं मझोले उद्योग हैं। लेकिन लचर ढांचे और सरकार की ओर से पर्याप्त समर्थन के अभाव में चमड़ा उद्योग अपनी चमक खोता जा रहा है।
इस उद्योग के जानकारों के मुताबिक चमड़ा क्षेत्र को विविधतापूर्ण उत्पाद आधार हासिल हो चुका है और यहां ज्यादातर इकाइयां एसएमई हैं। औद्योगिक ढांचा असंगठित और विकेंद्रीकृत है और तकरीबन 60-65 फीसदी उत्पादन छोटे और कुटीर उद्योगों से आता है। इन उत्पादों में सेमी-फिनिश्ड और फिनिश्ड चमड़ा, फुटवियर, फुटवियर सामान, चमड़ा सामान, चमड़ा परिधान, दस्ताने, काठी आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश में जहां कानपुर चमड़ा, फुटवियर और काठी के लिए मशहूर है वहीं आगरा फुटवियर के लिए जाना जाता है। चमड़ा परिधान, सामान और फुटवियर जैसे चमड़ा उत्पादों के लिए विख्यात अन्य शहरों में हैदाराबाद, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता शामिल हैं।
सिडबी की ओर से कानपुर के लिए चलाई जा रही पहल की प्रशंसा करते हुए सिडबी के उप महाप्रबंधक बसंत सेठ ने बिजनेस स्टैंडर्ड समाचार पत्र को बताया कि बैंक शहर में चमड़ा उद्यमों को प्रोत्साहित करने और इनका वजूद बनाए रखने के लिए कार्य कर रहा है। इन उद्यमों में अधिकांश लघु एवं मझोले उद्यम हैं।
उन्होंने कहा कि बैंक ने लेदर क्लस्टर में बिजनेस डेवलपमेंट सर्विसेज (बीडीएस) के बाजार के विकास को ध्यान में रख कर एक अध्ययन पहले ही पूरा कर लिया है। इस एसएमई क्लस्टर में बाजार आधारित बीडीएस को बढ़ावा दिया जाना ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में एसएमई के विकास के लिए आईबीआरडी, ब्रिटेन स्थित डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी), केएफडब्ल्यू और जीटीजेड द्वारा समर्थित परियोजना का एक हिस्सा है।
सिडबी कार्यान्वयन एजेंसी है और भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग का बैंकिंग डिवीजन है और यह इस परियोजना के लिए एक नोडल एजेंसी के तौर पर काम कर रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बैंक द्वारा एसएमई को वित्त, एसएमई उधारी से संबंधित बैंकों के जोखिम को कम करने, लेन-देन खर्च में कमी लाने और बाजार आधारित व्यापार विकास सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए एक सक्षम ढांचा तैयार करना है ताकि इनकी अपनी लाभप्रदता और प्रतिस्पर्धा में सुधार लाया जा सके।
इस अध्ययन के उद्देश्य से कानपुर लेदर क्लस्टर में शहरी कानपुर और उन्नाव जिलों में स्थित इकाइयों को शामिल किया गया है। कानपुर जिले को अब शहरी कानपुर और ग्रामीण कानपुर जिलों में विभाजित कर दिया गया है और ज्यादातर चमड़ा एवं चमड़ा उत्पाद इकाइयां शहरी कानपुर जिले में मौजूद हैं।
अधिकांश इकाइयां जजमऊ उन्नाव, बंथर और कानपुर सिटी में हैं। क्लस्टर में विभिन्न उत्पादों की रेज मौजूद है, लेकिन भैंस की खाल के प्रसंस्करण, सुरक्षित जूतों, सैंडल और चप्पल एवं काठी और घोड़े के लिए साजो-सामान आदि के निर्माण पर अधिक जोर दिया गया है। बाजार आधारित बीडीएस को बढ़ावा दिए जाने के संदर्भ में सिडबी ने देश में 20-35 क्लस्टरों की पहचान की है।