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दाइची-फोर्टिस मामले में सिंह बंधुओं को जेल

Last Updated- December 11, 2022 | 3:15 PM IST

सर्वोच्च न्यायालय ने दाइची-फोर्टिस मामले में आज मालविंदर सिंह और ​शिविंदर सिंह को छह महीने की जेल की सजा सुना दी तथा फोर्टिस-आईएचएच सौदे की फोरेंसिक जांच का आदेश दिया। 
दाइची सांक्यो की याचिका निपटाते हुए शीर्ष अदालत ने मामले को दिल्ली उच्च न्यायालय के पास भेज दिया और आईएचएच की खुली पेशकश पर रोक बरकरार रखी। सिंह बंधु दाइची भुगतान के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अमल करने में विफल रहे। इसलिए अदालत की अवमानना मामले में उन्हें नागरिक हिरासत प्रक्रिया के बाद छह महीने के लिए जेल भेज दिया गया। शीर्ष न्यायालय के आदेश के बाद स्टॉक एक्सचेंज पर फोर्टिस हेल्थकेयर का शेयर 16 फीसदी लुढ़क गया।
मले​शिया की कंपनी आईएचएच हेल्थकेयर ने 2018 में बोली लगाकर 1.1 अरब डॉलर देते हुए फोर्टिस में 31 फीसदी की नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी खरीदी थी। वह खुली पेशकश के जरिये बाजार से फोर्टिस में 26 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदना चाहती थी। लेकिन दाइची ने मुकदमा कर दिया और आईएचएच खुली पेशकश पर आगे नहीं बढ़ पाई। दाइची ने सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत के फैसले के तहत फोर्टिस के तत्कालीन प्रवर्तक सिंह बंधुओं से 3,600 करोड़ रुपये की वसूली के लिए फोर्टिस-आईएचएच सौदे को चुनौती दी थी।
मालविंदर और शिविंदर सिंह पर रैनबैक्सी के प्रवर्तक रहते हुए 2008 में जापान की कंपनी दाइची सांक्यो को बहुलांश हिस्सेदारी बेचते समय जानकारी छिपाने का आरोप था। सिंगापुर ट्राइब्यूनल ने 2016 में दाइची को 3,600 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था।
 सिंह बंधुओं और इंडियाबुल्स के ​खिलाफ याचिका दायर करते हुए दाइची ने आरोप लगाया था कि दोनों पक्षों ने फोर्टिस हेल्थकेयर के 17 लाख शेयर गिरवी रख दिए, जो फोर्टिस हेल्थकेयर हो​ल्डिंग के पास थे। सिंह बंधुओं ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा तय की गई मध्यस्थता रकम नहीं चुकाई तो दाइची ने 2018 में सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी।

 फोर्टिस और आईएचएच के बीच सौदे पर अगस्त 2018 में दस्तखत किए गए और उसी साल दिसंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने आईएचएच की खुली पेशकश पर रोक लगा दी थी। इससे पहले जब सिंह बंधु रैनबैक्सी को बेच रहे थे तो कंपनी को अमेरिकी औष​धि नियामक यूएसएफडीए और अमेरिकी न्याय विभाग की जांच का सामना करना पड़ा था। सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत ने सिंह बंधुओं को गलत दावा करने और गलत जानकारी देने का दोषी पाया था।

अदालत ने पाया था कि 2008 में जब दाइची सांक्यो ने 2.4 अरब डॉलर में रैनबैक्सी की 34.82 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी तो उसे गलत जानकारी दी गई थी। दाइची ने 2013 में सन फार्मास्युटिकल्स के हाथों रैनबैक्सी बेच दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने 15 फरवरी 2018 को बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों को फोर्टिस हेल्थकेयर के गिरवी शेयर 31 अगस्त से पहले बेचने की अनुमति दी थी। शीर्ष अदालत ने ​सिंह बंधुओं को कंपनी के बाकी शेयर गिरवी रखने से भी रोक दिया था।

First Published - September 22, 2022 | 10:03 PM IST

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