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छोटी कंपनियों ने किया टाटा का समर्थन, बोले आए थे उनके साथ और जाएंगे भी उनके साथ

Last Updated- December 07, 2022 | 6:42 PM IST

सिंगुर से नैनो निर्माण संयंत्र हटाने की रतन टाटा की धमकी के बाद नैनो के लिए कलपुर्जों की आपूर्ति करने वाले वेंडरों ने भी रतन टाटा के साथ सिंगुर छोड़ने को तैयार हो गए हैं।


टाटा परिसर में मौजूद 55 इकाइयों में से लगभग 30 इकाइयों ने उत्पादन भी शुरू कर दिया है , लेकिन इसके बाद भी वह सभी वहां से हटने को तैयार हैं। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने जिस 400 एकड़ जमीन की मांग की है उस जमीन के 290 एकड़ में वेंडरों की ही इकाइयां हैं।

ऑटोमेटिव स्टेंपिग बनाने वाली कंपनी कापारो इंजीनियरिंग के कंट्री प्रमुख उत्तम बोस ने कहा, ‘हमारी इकाइयां उत्पादन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं लेकिन अगर टाटा यहां से जाते हैं तो हम भी उनके साथ जाने के लिए तैयार हैं।

हम उन्हें अपने दूसरे संयंत्रों से भी आपूर्ति कर सकते हैं लेकिन वह संयंत्र सिंगुर की तरह सिर्फ टाटा के लिए नहीं होंगे।’ कापारो ने यहां संयंत्र लगाने के लिए 85 क रोड़ रुपये खर्च किए हैं।

यह कंपनी की अनुमानित लागत से 22 फीसदी ज्यादा है। टाटा के साथ जाने को तैयार सिर्फ कापारो ही नहीं बल्कि स्टीयरिंग बनाने वाली कंपनी सोना कोयो के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सुरिंदर कपूर ने बताया, ‘हम टाटा के साथ हैं, हम उनके साथ ही यहां आए थे।

अब जहां वह जाएंगे वहीं हम भी जाएंगे।’ यह पूछे जाने पर कि क्या वेंडर पार्क वहां इसे हटाने की ममता बनर्जी की मांग मानी जा सकती है? उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगता।

ममता बनर्जी को इस परियोजना के आर्थिक पहलूओं पर ध्यान देना चाहिए। यह एक कारोबारी परियोजना है ना कि कोई राजनीतिक परियोजना।’

ममता बनर्जी आज से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जा रही हैं। उनका कहना है कि नैनो संयंत्र के लिए दी गई जमीन में से लगभग 400 एकड़ जमीन किसानों की मर्जी के खिलाफ उनसे ली गई है। वह जमीन उन किसानों को वापस किए जाने को लेकर आंदोलन कर रही हैं।

हालांकि बंगाल सरकार का कहना है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1984 के तहत किसानों की मर्जी के खिलाफ 305 एकड़ जमीन का ही अधिग्रहण किया गया है।

वेंडरों को वहां से जाने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उनके वहां से हटने के कारण नैनो की लागत बढ़ जाएगी और कार की कीमत 1 लाख से ज्यादा हो सकती है।

टाटा रियरसन के प्रबंध निदेशक संदीपन चक्रवर्ती ने कहा कि यह पूरी परियोजना कार की कीमत ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। उन्होंने कहा, ‘हमारे सामने दो ही बातें थी।

पहली एक विश्व स्तरीय कार बनाना और दूसरी कम से कम कीमत पर। अगर हम यहां से हटते हैं तो इस कार की कीमत बढ़ जाएगी।’ वेंडर पार्क नैनो के निर्माण संयंत्र के बराबर में ही है।

इससे नैनो के कलपुर्जों को बिना किसी देरी के संयंत्र तक लाया जा सकता है और यह कार की कीमत कम रखने के लिए  बहुत जरूरी है।

सोना कोयो, टाटा रियरसन और कापारो इंजीनियरिंग 1 अक्तूबर से इस कार का उत्पादन करने के लिए तैयार हैं। बोस ने बताया शुरुआत में इस संयंत्र में रोजाना 20 नैनो का ही निर्माण किया जाएगा लेकिन दो महीनों में इसे बढ़ाकर 500 कर दिया जाएगा।

इस संयंत्र की सालाना उत्पादन क्षमता 2,50,000 कार की है जिसे बढ़ाकर 3,50,000 तक किया जा सकता है।



 

First Published - August 25, 2008 | 12:35 AM IST

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