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कोई लौटा दे हीरे की चमक

Last Updated- December 07, 2022 | 5:45 PM IST

अमेरिकी मंदी का सबसे बुरा असर भारतीय हीरा उद्योगों में काम करने वाले कारीगरों पर पड़ा है। भारतीय हीरों की मांग कम होने की वजह से हीरा कटिंग, फिनिशिंग और पैकिंग का काम कम हो गया है।


नतीजा, इस वर्ष अब तक करीब 25000 कारीगरों के हाथों से रोजगार छिन गया है। दुनियाभर में तैयार किए जाने वाले हीरों में से 90 फीसदी भारत में ही तैयार किए जाते हैं, जिसका सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है। यहां से करीब 70 फीसदी हीरे का निर्यात अमेरिका को होता था, जिसमें 80 फीसदी हिस्सेदारी मुंबई में तैयार हीरों की रहती थी।

लेकिन अमेरिकी अर्थव्यस्था की सुस्ती से हीरों की मांग बहुत कम हो गई है। जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल केचेयरमैन संजय कोठरी कहते हैं कि अमेरिकी मंदी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कम होने की वजह से घरेलू बाजार में मैन्युफैक्चरिंग का काम भी प्रभावित हुआ है।

बिक्री और मैन्युफैक्चरिंग, दोनों में तकरीबन 50-50 फीसदी की गिरावट आई है। सिर्फ मुंबई से निर्यात होने वाले हीरों की बात की जाए, तो इसमें 30 फीसदी की कमी आई है। मुंबई में हीरा उद्योग के विकास के लिए स्थापित सीप्ज (सांताक्रुज इलेक्ट्रॉनिक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन) में कारीगारों के बेरोजगारी की कहानी साफ तौर पर देखी जा सकती है।

सीप्ज में कुल 181 डायमंड कंपनियों के कारखाने हैं, जहां एक कंपनी में औसतन 600 कारीगर काम करते हैं। लेकिन इस समय कई कंपनियों ने अपने दो-तिहाई कारीगरों को नौकरी छोड़ने का नोटिस दे चुकी है। इसके अलावा, कई बड़ी कंपनियां यहां से अपना बोरिया बिस्तर बांध कर गुजरात चली गई हैं।

नाम न छापने की शर्त पर एक हीरा व्यापारी ने बताया कि गुजरात और चीन में अपना काम स्थापित करने के पीछे यहां लगने वाले करों के अलावा दूसरी मुख्य वजह काम कम होना और महंगे कारीगरों से पीछा छुड़ाना भी रहता है। सीप्ज की एक कंपनी में काम करने वाले जयेश के मुताबिक, कंपनियों की ओर से कहा जा रहा है कि दो महीने का एडवांस लो और काम छोड़कर जाओ।

डायमंड मार्केट के जानकार हार्दिक भाई कहते हैं कि मुंबई में कपड़ा मिलें और हीरे के कारखाने दो ऐसे क्षेत्र थे, जहां कम पढ़े लिखे लोग काम करके अपना घर आराम से चला लेते थे। मिले तो पहले ही बंद हो चुकी हैं और अब हीरा कारखाने बंदी के कगार पर है।

साल के अंत तक एक लाख कारीगर हो सकते हैं बेरोजगार
बिक्री आधी हुई और मुंबई से होने वाले निर्यात में 30 फीसदी की गिरावट

First Published - August 20, 2008 | 1:42 AM IST

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