सोना समूह की कंपनी सोना आकेगावा प्रेसिजन फॉर्जिंग्स लिमिटेड (एसओपीएफएल) चीन में एक फॉर्जिंग्स कंपनी के अधिग्रहण के बेहद करीब है।
3 हजार करोड़ रुपये के सोना समूह चीन में लगभग 132 करोड़ रुपये कीमत वाली कंपनी पर नजर डाले बैठा है। सोना समूह के चेयरमैन डॉ. सुरिन्दर कपूर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमारे पास मौजूद प्रेसिजन फॉर्जिंग तकनीक और इस चीनी कंपनी की कम लागत में उत्पादन की विशेषता दोनों एक-दूसरे के पूरक बनेंगे।
हमें उम्मीद है कि यह करार अगले 12 महीनों में पूरा हो जाएगा। फिलहाल हम निजी इक्विटी कंपनियों के साथ प्लेसमेंट के लिए बातचीत कर रहे हैं।’
चीन में उत्पादन केंद्र
इस अधिग्रहण से सोना आकेगावा को चीनी कंपनी को उत्पादन केन्द्र बनाने में मदद मिलेगी, जो घरेलू ओईएम को सुविधाएं मुहैया कराएगा और यूरोप और अमेरिका की कंपनियों को निर्यात करेगा। कंपनी के अनुसार एसओपीएफएल ही दुनियाभर में इकलौती कंपनी है जो प्रेसिजन फॉर्जिंग का उत्पादन करना जानती है। प्रेसिजन फॉर्जिंग दूनियाभर के ऑटो निर्माता स्पीड और बेवेल गीयरों के उत्पादन में करती है।
सोना समूह फिलहाल अमेरिका में एक, जर्मनी में तीन और भारत में तीन संयंत्र चलाती है। चीनी अधिग्रहण के बाद इसकी संख्या बढ़कर 7 हो जाएगी। प्रस्तावित चीनी अधिग्रहण के अलावा सोना समूह की प्रोपेलर शाफ्ट और ऑटोमोटिव क्लच बनाने वाली कपंनी महिंद्रा सोना पूर्वी जर्मनी में अधिग्रहण पर नजर टिकाए हुए है। डॉ. कपूर का कहना है, ‘हमें उनसे इस सप्ताह मिलने की उम्मीद है।’
बिक्री में इजाफे की उम्मीद
सोना समूह में मारुति सुजुकी की भी 7 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। उसे उम्मीद है कि 2010 तक उसकी कुल बिक्री 4200 करोड़ रुपये हो जाएगी। चीन और यूरोप में समूह की अधिग्रहण योजनाओं के अलावा समूह हरियाणा में लगभग 40 करोड़ रुपये लागत वाला अपना दूसरा उत्पादन संयंत्र लगा रहा है। इस संयंत्र में 200 कर्मियों को रोजगार दिया जाएगा।
चीनी कल पुर्जों के आयात से होने वाले असर के बारे में कपूर का कहना है, ‘जहां उद्योग जगत चीनी आयात की वजह से मुश्किलों का सामना कर रहा है, लोगों की जरूरत को ध्यान में रख कर बनाए गए हमारी कंपनियों के उत्पाद इस तरह के आयात से मुश्किलें नहीं झेल रहे। प्रेसिजन फॉजर्ड उत्पाद खासतौर पर डाई की नकल नहीं बनाई जा सकती और हमारे मार्जिन काफी बढ़े हैं।’