एम्सटर्डम की जिंस कारोबार कंपनी ट्रैफिगुरा ग्रुप और रूस की निवेश फर्म यूसीपी ने भारतीय रिफाइनर नायरा एनर्जी में अपनी 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है, क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंधों की वजह से कंपनी की कोष उगाही योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
एक बैंक अधिकारी ने कहा कि दोनों शेयरधारकों ने कई निवेशकों के साथ बातचीत शुरू की है, लेकिन यूक्रेन में मौजूदा हमलों की वजह से निवेशक ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। बैंक
अधिकारी ने नाम नहीं छापने के अनुरोध के साथ कहा, ‘भारत या विदेश में हिस्सेदारी लेने को निवेशक इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि वे मौजूदा परिचालन पर प्रतिबंधों के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।’
संपर्क किए जाने पर, ट्रैफिगुरा के अधिकारी ने कहा कि बिक्री प्रक्रिया को लेकर हमारे पास कोई जानकारी नहीं है। अधिकारी ने कहा, ‘जैसा कि ट्रैफिगुरा की 2021 की सालाना रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है, कंपनी ने टेंडरिल वेंचर्स (नायरा एनर्जी) में अपना इक्विटी निवेश बेचने का निर्णय लिया है।’ रूस में यूसीपी और नायरा एनर्जी को इस संबंध में भेजे गए ईमेल संदेश का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।
नायरा के शेयरधारकों में रूसी ऊर्जा दिग्गज रोजनेफ्ट और ट्रैफिगुरा तथा यूसीपी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम की 49.13 प्रतिशत की समान भागीदारी है। एस्सार ऑयल की पूर्ववर्ती अल्पांश शेयरधारक की भी इसमें मामूली हिस्सेदारी है।
वर्ष 2017 में, रोजनेफ्ट, यूसीपी और ट्रैफिगुरा ने 12.9 अरब डॉलर में रुइया परिवार से भारतीय रिफाइनर का अधिग्रहण किया था और इससे उन्हें दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ रहे बाजार में उपस्थिति दर्ज करने में मद मिली।
कंपनी गुजरात के वाडीनार में भारत की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी की मालिक है, जिसकी क्षमता 2 करोड़ टन सालाना (14 करोड़ बैरल के बराबर) है। कंपनी की ऑयल रिटेलिंग में भी उपस्थिति है और पिछले साल 31 दिसंबर तक भारत के विभिन्न हिस्सों में उसके 6,496 चालू रिटेल आउटलेट थे और उसने इस साल दिसंबर तक यह आंकड़ा बढ़ाकर 7,300 करने की योजना बनाई है।
कंपनी मौजूदा वित्त वर्ष में 4,262 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। केयर रेटिंग्स द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, इसमें से करीब 4,000 करोड़ रुपये, दोनों वर्षों में पॉलिप्रोपीलेन परियोजना पर खर्च होंगे जबकि शेष राशि नियमित एवं मैंटेनेंस खर्च में इस्तेमाल की जाएगी, जिसका वित्त पोषण ऋण और इक्विटी के समावेश के जरिये किया जाएगा।
यूक्रेन में युद्ध के बाद कंपनी की डेट योजनाओं की रेटिंग घटाए जाने के बाद कंपनी को ऋण समझौते के शर्तों के अनुसार, गैर-परिवर्तनीय बॉन्डों पर अधिक ब्याज दर का भुगतान करना पड़ा था, जिससे किसी डाउनग्रेड के लिए आशंका को बढ़ावा मिला है।