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यूनिकॉर्न जेटवर्क की IPO की तैयारी: गोपनीय रूप से दाखिल किया मसौदा, ₹4,200 करोड़ जुटाने का लक्ष्य

सूत्रों के अनुसार कंपनी प्री-आईपीओ वाले दौर में 450 करोड़ रुपये से 500 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए भी चर्चा कर रही है

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पीरज़ादा अबरार   
Last Updated- March 30, 2026 | 10:07 PM IST

जेटवर्क ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए गोपनीय रूप से मसौदा दाखिल किया है। घटनाक्रम के जानकार सूत्रों ने यह बात बताई। बिजनेस-टु-बिजनेस विनिर्माण क्षेत्र की मार्केटप्लेस 4,200 करोड़ रुपये (लगभग 45 करोड़ डॉलर) तक की रकम जुटाने पर विचार कर रही है। 

कंपनी इस साल के आखिर में शेयर बाजार में सूचीबद्धता का लक्ष्य कर रही है। कंपनी ने निर्गम के प्रबंधन के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनैंशियल, एवेंडस कैपिटल, पैंटोमैथ कैपिटल के साथ-साथ एचएसबीसी की भारतीय सहायक कंपनियों मॉर्गन स्टेनली और गोल्डमैन सैक्स को नियुक्त किया है। कंपनी ने इस नए घटनाक्रम पर टिप्पणी से इनकार कर दिया।

सूत्रों के अनुसार कंपनी प्री-आईपीओ वाले दौर में 450 करोड़ रुपये से 500 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए भी चर्चा कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि जुटाई जाने वाली इस रकम से उसकी बैलेंस शीट मजबूत होगी और साथ ही कुछ शुरुआती निवेशकों को आंशिक निकासी का मौका मिलेगा। रकम जुटाने की इस कवायद में जेटवर्क का मूल्यांकन लगभग 3 अरब डॉलर है, जो काफी हद तक पिछले दौर की तरह ही है।

कंपनी को खोसला वेंचर्स, बैली गिफोर्ड और इंडिगो के संस्थापक राकेश गंगवाल जैसे निवेशकों का समर्थन है। साथ ही ऐक्सेल, पीक 15 और लाइटस्पीड जैसे शुरुआती निवेशक भी शामिल हैं। 

जेटवर्क प्रौद्योगिकी-संचालित विनिर्माण प्लेटफॉर्म है जो दुनिया भर में औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ावा देता है। कंपनी अपने स्वामित्व वाली विनिर्माण परिचालन प्रणाली के जरिये यूनिवर्सल फैक्टरी में अपनी इकाइयों और तीसरे पक्ष के आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क में विनिर्माण क्षमता शामिल करती है।

साल 2018 में आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र अमृत आचार्य और श्रीनाथ रामकृष्णन द्वारा स्थापित जेटवर्क को आईटीसी के अपने पूर्व सहयोगियों विशाल चौधरी, अंकित फतेहपुरिया और राहुल शर्मा के साथ मिलकर तैयार किया गया था। दुनिया भर में 20 से अधिक अपनी विनिर्माण इकाइयों और 5,000 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क के साथ कंपनी ने तेजी से स्टार्टअप से वैश्विक औद्योगिक कंपनी के रूप में विस्तार किया है।

एंट्रैकर के अनुसार कंपनी ने वित्त वर्ष 25 के दौरान सकल राजस्व में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जो पिछले साल के 14,443 करोड़ रुपये से घटकर 12,798 करोड़ रुपये रह गया, जबकि उसके घाटे में 60 प्रतिशत तक की कमी आई।

First Published : March 30, 2026 | 10:07 PM IST