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क्विक कॉमर्स दे रहा पैकेटबंद खानपान के बाजार को नया रूप

क्विक कॉमर्स अब केवल तेज डिलीवरी का माध्यम नहीं, बल्कि पैकेटबंद खाद्य और पेय बाजार के लिए एक बड़ा बदलावकारी बल बन रहा है

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पीरज़ादा अबरार   
Last Updated- March 20, 2026 | 8:59 AM IST

देश का पैकेटबंद खाद्य और पेय पदार्थों का बाजार बढ़ोतरी के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। अनुमान है कि यह बाजार साल 2030 तक लगभग 100 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 150 अरब डॉलर से ज्यादा का हो जाएगा। सलाहकार कंपनी रेडसीर की ताजा रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।

बदलते परिदृश्य में अकेले क्विक कॉमर्स चैनल का जीएमवी (सकल व्यापार मूल्य) ही मौजूदा 4 अरब डॉलर की तुलना में बढ़कर साल 2030 तक 25 अरब डॉलर से ज्यादा तक पहुंच जाने की उम्मीद है। इसकी मुख्य वजह रफ्तार, सुविधा और बार-बार की जाने वाली खरीदारी की बढ़ती मांग है।

रेडसीर स्ट्रेटजी कंसल्टेंट्स में साझेदार मृगांक गुटगुटिया ने कहा, ‘क्विक कॉमर्स पैकेटबंद भोजन और पेय पदार्थों के बाजार में संरचनात्मक ताकत के रूप में उभर रहा है और इसकी वजह उपभोक्ता की इच्छा के समय ही मांग पूरा करने की इसकी क्षमता है।’

उन्होंने कहा, ‘जिस चीज को कभी मुख्य रूप से वितरण चैनल के तौर पर देखा जाता था, वह अब पूरे तंत्र में श्रेणियों की रणनीति, नवाचार की प्राथमिकताओं और निवेश के फैसलों को आकार देना शुरू कर रही है। ब्रांड, परिचालकों और निवेशकों के लिए यह इस बात में बुनियादी बदलाव का संकेत है कि भविष्य में वृद्धि किस तरह और कैसे तेजी से हासिल की जाएगी।’ क्विक कॉमर्स अब केवल ऐनवक्त पर सामान पहुंचने वाले चैनल से कहीं आगे निकल चुका है।

First Published : March 20, 2026 | 8:59 AM IST