जोमैटो के 9,375 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को 16 जुलाई 2021 को 30 गुना से अधिक अभिदान मिला था। इससे इस बहस पर विराम लग गया कि क्या भारत के सार्वजनिक बाजार घाटे में चल रहीं उन कंपनियों द्वारा शेयर बिक्री किए जाने को लेकर तैयार हैं, जिन्हें लेकर अभी यह साफ नहीं है कि वे कब मुनाफे में आएंगी। अगर कोई संदेह बचा भी, तो वह सूचीबद्धता के दिन जोमैटो के शेयर की कीमत में 66 फीसदी बढ़ोतरी से दूर हो गया। इससे अन्य स्टार्टअप के आईपीओ लाने का रास्ता खुल गया।
कुछ ही महीनों में नायिका, पॉलिसी बाजार और पेटीएम जैसी नए दौर की कंपनियां भी अपने आईपीओ लेकर आ गईं, जिन्हें महामारी के बाद प्रोत्साहन उपायों से बेहतर नकदी स्थिति का सहारा मिला। जोमैटो का आईपीओ आने के बाद के एक साल में एक्सचेंजों पर स्टार्टअप का प्रदर्शन मिलाजुला रहा है। पेटीएम को छोड़कर ज्यादातर ने अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन वे अपनी बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रही हैं। नए दौर की कंपनियों के शेयर अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से तेजी से फिसले हैं, जिससे बाजार पूंजीकरण में 3.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। नायिका और हाल में सूचीबद्ध लॉजिस्टिक कंपनी डेलिवरी को छोड़कर ज्यादातर के शेयर उनकी निर्गम कीमत से कम पर उपलब्ध हैं।
सेंट्रम कैपिटल के प्रबंध निदेशक (निवेश बैंकिंग) राजेंद्र नायक ने कहा कि भेड़चाल की मानसिकता और दुनिया की दौड़ से पीछे छूट जाने की भावना के कारण स्टार्टअप के आईपीओ को अच्छी प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने कहा, ‘जोमैटो के आईपीओ ने सूचीबद्ध होने की चाहत रखने वाली नई दौर की कंपनियों के लिए शुरुआत की। उसके बाद पूरे बाजार में ही गिरावट और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के शेयर लुढ़कने से देसी स्टार्टअप के शेयरों की कीमतों में भी अहम गिरावट आई है। अब मूल्यांकन सामान्य स्तर पर आ गए हैं। निकट भविष्य में नए दौर की तकनीकी कंपनियों के लिए आईपीओ लाना शायद आसान नहीं होगा।’
निवेश बैंकरों का कहना है कि सर्वोच्च स्तर से तेजी से फिसलने की वजह तरलता के समीकरणों में बदलाव है। जब अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल कम था, तब निवेशक मुनाफे में नहीं चल रहीं कंपनियों पर दांव लगाने को तैयार थे। हालांकि अब पूंजी की लागत बढ़ रही है, इसलिए वह जोश ठंडा पड़ गया है। डीएएम कैपिटल एडवाइजर्स के एमडी और सीईओ धर्मेश मेहता ने कहा, ‘बाजार के हालात बदल गए हैं। बहुत से शेयर अपने सर्वोच्च स्तरों से फिसल गए हैं। इससे सभी के मूल्यांकन पर असर पड़ा है।’