विमानन मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि एयरलाइनें हवाई अड्डों पर चेक-इन काउंटरों में बोर्डिंग पास जारी करने के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकतीं। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो मौजूदा समय में यात्रियों से चेक-इन काउंटर पर बोर्डिंग पास जारी करने पर शुल्क वसूलती है।
मंत्रालय द्वारा जारी एक सर्कुलर में कहा गया है, ‘नागर विमानन मंत्रालय को यह पता चला है कि एयरलाइनें यात्रियों को बोर्डिंग पास जारी करने के लिए अलग से पैसा वसूल रही हैं।’ इसमें कहा गया है कि यह अतिरिक्त राशि एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के प्रावधानों के तहत निर्धारित निर्देशों के अनुरूप नहीं है। यात्रियों द्वारा अतिरिक्त शुल्क को लेकर ट्विटर पर शिकायत किए जाने के बाद मंत्रालय की ओर से यह सख्ती दिखाई गई है।
नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुरू में कहा था कि उन्होंने संबद्ध अधिकारियों से इस मामले को देखने का निर्देश दिया है।
कोविड की वजह से यात्राएं बंद किए जाने के बाद विमानन क्षेत्र को पुन: खोले जाने के बाद सरकार ने यात्रियों को सोशल डिस्टेंसिंग बढ़ाने के लिए वेब चेक-इन अनिवार्य बना दिया था। उसके बाद इंडिगो, स्पाइसजेट और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइनों ने वेब चेक इन न करने वाले यात्रियों से शुल्क वसूलना शुरू कर दिया था। ये एयरलाइनें यात्री से बोर्डिंग पास की प्रिंटिंग के लिए औसत 200 रुपये वसूलती हैं और इतनी ही वेब चेक-इन के बजाय हवाई अड्डे पर चेक-इन होने पर घरेलू यात्रियों से फैसिलिटेशन फी के तौर पर वसूली जाती है।
हालांकि यात्रियों ने इस कदम की प्रशंसा की, लेकिन एयरलाइन अधिकारियों का कहना है कि इससे वेब चेक-इन में कमी आएगी और चेक-इन काउंटरों पर भीड़ बढ़ जाएगी, जिससे विलंब भी होगा।
एक एयरलाइन के अधिकारी ने कहा, ‘सरकार ने कोविड की वजह से आक्रामक तौर पर वेब चेक-इन को बढ़ावा दिया था जिससे कि सोशल डिस्टेंसिंग पर पूरी तरह से पालन किया जा सके।