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कमिंस इंडिया को दमदार मांग से दम

Last Updated- December 11, 2022 | 4:20 PM IST

कमिंस इंडिया का शेयर जून के अपने निचले स्तर से लगातार बढ़त दर्ज कर रहा है। उसमें अब तक 27 की बढ़त दर्ज की जा चुकी है। इस शेयर को जून तिमाही (जून 2023 की पहली तिमाही) में दमदार प्रदर्शन के अलावा बेहतर मांग और मार्जिन में सुधार की उम्मीदों से रफ्तार मिल रही है। कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने इसके लिए अपने आय अनुमान को बढ़ा दिया है। जबकि कुछ अन्य इस शेयर के मूल्य में जबरदस्त तेजी और मार्जिन में सुधार की सुस्त रफ्तार को देखते हुए कहीं अधिक सतर्क हैं।

मांग परिदृश्य इस शेयर के लिए काफी महत्त्वपूर्ण कारक होगा। कंपनी ने कहा है कि दमदार घरेलू और निर्यात मांग के कारण कुल मांग में तेजी बरकरार है। जहां तक घरेलू बाजार का सवाल है तो औद्योगिक कारोबार के चुनिंदा क्षेत्रों में तेजी दिख रही है। डीजल जेनसेट बाजार के अधिकतर क्षेत्रों से वृद्धि को रफ्तार मिल रही है। फार्मा, बायोटेक, रियल्टी, रेलवे, दूरसंचार, खनन और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र मांग को गति दे रहे हैं।

मजबूत मांग के बदल पर तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व सालाना आधार पर 42 फीसदी और क्रमिक आधार पर 13 फीसदी बढ़कर 1,687 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के राजस्व में 71 फीसदी का योगदान करने वाली घरेलू बिक्री में सालाना आधार पर 36 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि निर्यात बाजार की बिक्री में एक साल पहले की समान तिमाही के मुकाबले 57 फीसदी की वृद्धि हुई।

यूरोप (निर्यात राजस्व में 20 फीसदी योगदान), एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों की बिक्री में सुधार दिखा है। पश्चिम एशिया और अफ्रीका में तेल पर निर्भर बाजारों में अधिक मांग और बेहतर निष्पादन दिखा। कम हॉर्सपावर (एलएचपी) वाले जेनसेट में सालाना आधार पर 47 फीसदी की दमदार वृद्धि दर्ज की गई जबकि अधिक हॉर्सपावर वाले जेनसेट में पहली तिमाही के दौरान 35 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

जुलाई 2023 से लागू होने वाले सख्त प्रदूषण मानदंड (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड IV) से वृद्धिशील राजस्व को रफ्तार मिलेगी। इससे वित्त वर्ष 2023 की दिसंबर और मार्च तिमाहियों में पूर्व-खरीद हो सकती है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज का मानना है कि कंपनी के लिए आगे कई चुनौतियां हैं जैसे सख्त प्रदूषण मानदंड, पूंजीगत खर्च चक्र में सुधार, कम कार्बन उत्सर्जन वाले वैकल्पिक ईंधन, उद्योगों में सुधार और अनुकूल विनिर्माण नीतियां शामिल हैं।

हालांकि प्रबंधन ने उम्मीद जताई है कि आगे दो अंकों की वृद्धि दिखेगी लेकिन कंपनी ने कमजोर भू-राजनीतिक परिदृश्य, महंगाई और आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चिंताओं को देखते हुए कोई अनुमान जाहिर नहीं किया है। 

First Published - August 24, 2022 | 9:55 PM IST

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