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मजबूत ऑर्डर बुक से इन्फ्रा, पूंजीगत वस्तु फर्मों को दम

Last Updated- December 11, 2022 | 5:36 PM IST

सरकार के पूंजीगत खर्च से चालू वित्त वर्ष (2022-23) की पहली तिमाही में इन्फ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत वस्तु कंपनियों के राजस्व एवं मुनाफे में वृद्धि संभावित है। हालांकि तिमाही आधार पर, इन दोनों मोर्चों पर आंकड़े कमजोर रहने का अनुमान है, क्योंकि पहली तिमाही को इन कंपनियों के लिए मौसमी तौर पर कमजोर तिमाही माना जाता है।
बीएस रिसर्च ब्यूरो द्वारा संकलित किए गए आंकड़े के अनुसार इस क्षेत्र के विश्लेषकों को इन कंपनियों के लिए सालाना आधार पर 18.7 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि और करीब 70 प्रतिशत कर-बाद लाभ (पीएटी) वृद्धि का अनुमान है। इन कंपनियों में लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी), थर्मेक्स एबीबी, और केईसी इंटरनैशनल मुख्य रूप से शामिल हैं।
तिमाही आधार पर, राजस्व और पीएटी वृद्धि दोनों में इस क्षेत्र की कंपनियों के लिए 40.8 प्रतिशत और 66.4 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, क्योंकि रुपये में कमजोरी और जिंस कीमतों में कुछ नरमी की वजह से मार्जिन दबाव बना हुआ है।
रुपये में कमजोरी से आयातित माल की संपूर्ण लागत में इजाफा हुआ है जिससे ऐसे उत्पादों के घरेलू निर्माताओं को कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि जहां तेल एवं धातुओं की वैश्विक कीमतों में मंदी की आशंका के बीच बाद में नरमी आई है, वहीं मौजूदा मौद्रिक उतार-चढ़ाव की वजह से यह लाभ प्रभावित होगा, क्योंकि इन कंपनियों के लिए ब्याज लागत बढ़ गई है।
कंपनियों ने अपने अनुबंधों में प्राइस वैरिएंस (पीवी) क्लॉज में बदलाव लाकर जिंस और मौद्रिक जोखिम पर ध्यान दिया है।
एलऐंडटी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी एस एन सुब्रमण्यन ने एक ताजा संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हमारे कई अनुबंध पीवी क्लॉज से जुड़े हुए हैं। कुछ पर जिंस कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से मार्जिन पर कोई असर नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, हमें बैलेंस शीट को संतुलित बनाना होगा, सुनिश्चित करना होगा कि सभी अनुबंध पीवी क्लॉज से जुड़े हों, कीमत वृद्धि के हालात में मोलभाव करना होगा।’
चुनौतियों के बावजूद विश्लेषक और कंपनियां इस पर कायम हैं कि ऑर्डर को लेकर पूछताछ और पूंजी प्रवाह पहली तिमाही में मजबूत रहा है जिसके अलावा बुनियादी ढांचा विकास पर सरकार द्वारा लगातार जोर दिए जाने और निजी क्षेत्र की पूंजीगत वस्तु गतिविधि में कोविड-19 की दो साल की सुस्ती के बाद अब तेजी आने से भी मदद मिली है।
भले ही, 2021-22 की जनवरी-मार्च तिमाही इन कंपनियों के लिए मजबूत अवधि बनी रही, क्योंकि ऑर्डर प्रवाह इस अवधि में अच्छा रहने की संभावना है।
येस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों हितेश जैन, हेमंत नाहटा, और केवल शाह ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र की अपली पहली तिमाही पूर्व समीक्षा में कहा है, ‘डेटा सेंटर, मेट्रो परियोजनाओं, विद्युत पारेषण एवं वितरण, और खनन जैसे क्षेत्र लगातार भारत में मजबूत वृद्धि बरकरार रखेंगे।’
विश्लेषकों का कहना है, ‘निर्यात के मोर्चे पर, ऑर्डर और पूछताछ की प्रक्रिया पश्चिम एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप और दक्षिण एशियाई क्षेत्रों से मजबूत बना हुआ है।’ कंपनियों ने भी इसका संकेत दिया है। उनका कहना है कि इस साल अप्रैल और जून के बीच भारत और
पश्चिम एशिया जैसे बाजारों से ऑर्डर प्रवाह की स्थिति अच्छी रही है। उदाहरण के लिए, केईसी इंटरनैशनल ने हाल में कहा कि उसे रेलवे, विद्युत पारेषण एवं वितरण, हाइड्रोकार्बन, केबल, वायर और डेटा केंद्र समेत विभिन्न सेगमेंटों से 1,146 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले।

First Published - July 12, 2022 | 11:53 PM IST

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