दिग्गज खनिज कंपनी एनएमडीसी के बैंकर और शेयरधारक कंपनी के इस्पात संयंत्र को विभाजित करने को मंजूरी देने जा रहे हैं। इससे कंपनी की बिक्री का रास्ता साफ हो जाएगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि इस विभाजित कंपनी की बिक्री में भारत की शीर्ष इस्पात कंपनियों के हिस्सा लेने के आसार हैं। इस बिक्री से 4 अरब डॉलर तक की कीमत मिल सकती है क्योंकि कंपनी की छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क की खदानें होने से बोली में प्रतिस्पर्धा तगड़ी रहेगी।
इस समय कंपनी में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 60.8 फीसदी है। यह चालू कैलेंडर वर्ष में छत्तीसगढ़ के नगरनार में स्थित सालाना 30 लाख टन क्षमता के इस्पात संयंत्र में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। विभाजन की योजना के मुताबिक इस्पात कंपनी में एनएमडीसी की मिरर शेयरधारिता होगी और एनएमडीसी द्वामरा इस्पात संयंत्र में किए गए 18,000 करोड़ रुपये के निवेश को इक्विटी के रूप में नगरनार इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट (एनआईएसपी) में हस्तांतरित किया जाएगा।
एक बैंकिंग सूत्र ने कहा, ‘भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की बिक्री प्रक्रिया में सरकार को महज एक बोली मिली और इस बिक्री को टालना पड़ा। लेकिन इससे इतर एनएमडीसी के इस्पात संयंत्र के लिए सभी इस्पात कंपनियां बोली लगाएंगी क्योंकि इसके पास लौह अयस्क की खदानें हैं।’
बैंकर ने नाम प्रकाशित नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि बिक्री प्रक्रिया में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, आर्सेलरमित्तल और वेदांत के हिस्सा लेने की संभावना है।
एनएमडीसी का शेयर आज 3.5 फीसदी चढ़कर 111 रुपये पर बंद हुआ। इस तरह कंपनी का कुल बाजार मूल्यांकन 32,559 करोड़ रुपये था। एनएमडीसी का शेयर इस साल जनवरी से करीब 16.7 फीसदी टूटा है। एनएमडीसी की तरफ से स्टॉक एक्सचेंजों को भेजे गए नोटिस के मुताबिक पहले ऋणदाताओं और शेयरधारकों की बैठक 7 जून को होनी थी, लेकिन कंपनी मामलों के मंत्रालय द्वाोरा बैठक के लिए नियुक्त चेयरमैन के उपलब्ध नहीं होने और इक्विटी शेयरधारकों के बीच कोरम की अनुउपब्धता के कारण इसे स्थगित करना पड़ा।
एनएमडीसी पर इस साल मार्च में कुल कर्ज 3,500 करोड़ रुपये था और इस कर्ज में से कुछ हिस्सा इस्पात कंपनी पर भी डाला जाएगा। वर्ष 2019 में एनएमडीसी के बोर्ड ने इस्पात संयंत्र पर पूंजीगत व्यय के लिए 5,000 करोड़ रुपये जुटाने को मंजूरी दी थी। इसमें से इस्पात संयंत्र के आंशिक वित्त पोषण के लिए भारतीय स्टेट बैंक से 4,476 करोड़ रुपये की रुपया मियादी ऋण सुविधा ली गई। कंपनी इस सुविधा के तहत पहले ही 1,144 करोड़ रुपये ले चुकी है और ये ऋण नए मालिक को हस्तांतरित किए जाएंगे। एनआईएसपी की कुल परियोजना लागत 21,940 करोड़ रुपये थी।