दवा बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 43 फीसदी बढ़कर 2,061 करोड़ रुपये हो गया।
तिमाही के दौरान कंपनी का प्रदर्शन बाजार के अनुमान से बेहतर रहा जिसे भारत सहित अमेरिका और उभरते बाजारों में हुई दमदार बिक्री से बल मिला। तिमाही के दौरान कंपनी की सकल बिक्री 10.1 फीसदी बढ़कर 10,644 करोड़ रुपये हो गई जो एक साल पहले की समान अवधि में 9,719 करोड़ रुपये रही थी।
तिमाही के दौरान एबिटा 2,884.4 करोड़ रुपये रही जबकि एबिटा मार्जिन 26.8 फीसदी दर्ज किया गया। बीएसई पर सन फार्मा का शेयर शुक्रवार को 5.4 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ।
कंपनी ने कहा कि कोविड संबंधी दवाओं की बिक्री को छोड़कर कुल बिक्री में करीब 14 फीसदी की वृद्धि हुई। भारतीय फॉर्मूलेशन कारोबार में 13 फीसदी की वृद्धि हुई। एकल आधार पर यह वृद्धि पिछले साल की पहली तिमाही के मुकाबले 2.4 फीसदी अधिक रही।
अमेरिकी फॉर्मूलेशन की बिक्री तिमाही के दौरान 10.7 फीसदी बढ़कर 42 करोड़ डॉलर हो गई। उभरते बाजारों में दवाओं की बिक्री 12.6 फीसदी बढ़कर 24.5 करोड़ डॉलर और शेष दुनिया में बिक्री 2.6 फीसदी बढ़कर 19 करोड़ डॉलर हो गई। कंपनी के प्रबंध निदेशक दिलीप सांघवी ने कहा, ‘पहली तिमाही के लिए हमारे सभी कारोबार ने अच्छी वृद्धि दर्ज की जिसे हमारे स्पेशिएलिटी कारोबार में विस्तार और विभिन्न बाजारों में समग्र विकास से बल मिला।’
उन्होंने कहा कि स्पेशिएलिटी आरऐंडडी का कुल आरऐंडडी में 21 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल कंपनी चार स्पेशिएलिटी मॉलिक्यूल पर काम कर रही है जो क्लीनिल परीक्षण के दौर में हैं।
जायडस वेलनेस का शुद्ध लाभ बढ़ा
स्वास्थ्य उत्पाद बनाने वाली कंपनी जायडस वेलनेस का एकीकृत शुद्ध लाभ 30 जून को समाप्त पहली तिमाही में 4.75 फीसदी बढ़कर 137.01 करोड़ रुपये हो गया। अधिक खर्च और संयंत्र को बंद करने के लिए एकमुश्त खर्च से कंपनी का मुनाफा प्रभावित हुआ है। कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजारों को यह सूचना दी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2021-22 की समान अवधि में 130.8 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ कमाया था। चालू वित्त वर्ष 2022-23 की समीक्षाधीन तिमाही में उसकी कुल एकीकृत आय बढ़कर 698.71 करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले की अवधि में यह 599.97 करोड़ रुपये रही थी। जायडस वेलनेस का बीती तिमाही में कुल खर्च बढ़कर 558.82 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में उसका खर्च 469.17 करोड़ रुपये था। कंपनी ने कहा कि पहली तिमाही के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री की लागत 250.12 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 149.59 करोड़ रुपये थी।
सिप्ला का मुनाफा 3.96 फीसदी घटा
प्रमुख औषधि कंपनी सिप्ला का कर पश्चात लाभ वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 3.96 फीसदी घटकर 686.4 करोड़ रुपये रह गया। तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व 2 फीसदी घटकर 5,375 करोड़ रुपये रहा गया।
सिप्ला के भारतीय कारोबार का राजस्व तिमाही के दौरान 8.4 फीसदी घटकर 2,483 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी ने कहा कि पर्ची वाली ब्रांडेड ब्रांडेड दवा कारोबार पर कोविड-19 के प्रभाव के सामान्य होने के कारण ऐसा हुआ। कंपनी ने कहा कि कोविड-19 दवाओं को समायोजित करने के बाद भारतीय कारोबार ने 9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जिसे प्रमुख ब्रांडों से रफ्तार मिली।
सिप्ला के एमडी एवं वैश्विक सीईओ उमंग वोहरा ने कहा कि कंपनी घरेलू बाजार में लगातार नई दवाओं को लॉन्च करती रहेगी जिसमें सिटाग्लिप्टीन (मधुमेह) और वल्सार्टन (हाइपरटेंशन) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी मुख्य तौर पर डरमैटोलॉजी, ऑप्थेल्मोलॉजी, महिला स्वास्थ्य एवं सीएनएस (न्यूरोलॉजी) पर ध्यान केंद्रित करेगी।
उत्तरी अमेरिका में कारोबार में सिप्ला का राजस्व 10 फीसदी बढ़कर 15.5 करोड़ डॉलर हो गया। इसे मुख्य तौर पर श्वसन संबंधी दवाओं से बल मिला। कंपनी जल्द ही अमेरिका में जेनेरिक एडवायर को लॉन्च करेगी।
सिप्ला ने आगामी छमाही के दौरान यूएसएफडीए के कई निरीक्षण की उम्मीद कर रही है जो अमेरिका में उसके संभावित लॉन्च के लिए महत्त्वपूर्ण होंगे। बीएस