कारोबारी दुनिया में जिस तेजी के साथ प्रतिस्पद्र्धा बढ़ती जा रही है उससे कर्मचारियों में तनाव बढ़ना तो लाजमी है।
अब कंपनियां इस ओर अपना ध्यान लगा रही हैं कि आखिर किस तरह कर्मचारियों को तनावमुक्त रखा जाए। उन्हें इसका सबसे सीधा और आसान सा तरीका लग रहा है मेडिटेशन यानी ध्यान।
कॉरपोरेट कंपनियां अब उस चिकित्सा पद्धति की ओर रुख कर रही हैं जिसका जिक्र हमारी सदियों पुरानी परंपरा में किया गया है। कंपनियां इन कोशिशों में जुटी हुई हैं कि आखिर कैसे वे अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को तनावमुक्त वातावरण दे सकें।
बाघ बकरी समूह और कैडिला हेल्थकेयर ने अपने कर्मचारियों के लिए मेडिटेशन रूम तैयार कराया है। वहीं क्लैरिस लाइफसाइंसेज की योजना अहमदाबाद के अपने कॉरपोरेट ऑफिस में ‘साइलेंस और पीस’ विंग तैयार करने की है।
अहमदाबाद में बाघ बकरी के कॉरपोरेट ऑफिस में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को ध्यान रूम में बैठे देख सकेंगे। ये कर्मचारी काम से समय निकालकर ध्यान रूम में कुछ समय बिताते हैं ताकि रोज की भागदौड़ से वे कुछ छुटकारा पा सकें और खुद को थोड़ा सुकून दे सकें।
इस रूम में एक साथ 30 लोगों के बैठने की जगह है और काम की भागदौड़ से बचने के लिए अगर वे संगीत सुनना चाहें तो इसके लिए इस रूम में म्यूजिक सिस्टम भी लगा हुआ है। यानी ध्यान लगाते वक्त कर्मचारी बाहरी शोर शराबे की जगह पर मधुर संगीत का आनंद उठाया जा सकता है।
बाघ बकरी के प्रबंध निदेशक राजेश देसाई इस बारे में बताते हैं कि उनके ऑफिस में करीब 160 कर्मचारी हैं और उनमें से कई कर्मचारी दोपहर के बाद ध्यान रूम में जाते हैं। कर्मचारियों के पास लंच के बाद 15 से 20 मिनट का खाली समय होता है जिसका इस्तेमाल वे काम से अलग हटकर दिमाग को शांत करने के लिए करते हैं।
आमतौर पर कर्मचारी काम के बोझ तले इतना दबे होते हैं कि कुछ मिनटों की शांति और ध्यान भी उन्हें फिर से तरोताजा करने के लिए काफी होता है। कंपनी के कर्मचारियों के लिए ध्यान रूम बनवाने का सुझाव देसाई ने ही दिया था। बाघ बकरी के अध्यक्ष पीयूष देसाई का कहना है कि जब भी कभी निदेशक मंडली के सभी सदस्य शहर में होते हैं तो काम शुरू करने के पहले सभी ध्यान रूम में एक साथ मिलते हैं।
यहां एक साथ कुछ समय बिताने के बाद ही वे अपना काम शुरू करते हैं। देसाई कहते हैं, ‘कर्मचारियों को काम के बोझिल घंटो के बीच कुछ समय चाहिए होता है जिसमें वे काम के दबाव से मुक्त होकर मानसिक शांति का अनुभव कर सकें। ध्यान रूम उन्हें एक ऐसा मंच देता है जहां वे शांति से बैठकर खुद को तरोताजा कर सकें। ‘
उन्होंने कहा कि कई बार तो सुबह का काम शुरू करने के पहले कर्मचारी ध्यान कक्ष में आते हैं और कई दफा दोपहर के खाने के बाद कर्मचारी ध्यान रूम में जाते हैं ताकि दिन भर की थकान को दूर किया जा सके। देसाई ने कहा कि दोपहर को ध्यान रूम में जाने के बाद कर्मचारियों में काम करते करते आई बोरियत खत्म हो जाती है ।