कॉफी के कारोबार को दिसंबर 2004 में अलविदा कहने के बाद टाटा कॉफी फिर से इस कारोबार में आने की योजना बना रही है।
कंपनी देश भर में कैफे शृंखला खोलकर इस कारोबार में आने की तैयारी कर रही है। प्रवासी भारतीय सी शिवशंकरन को बरिस्ता में अपनी 34.3 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के बाद कंपनी ने इस कारोबार को अलविदा कह दिया था। कंपनी बरिस्ता के साथ हुए गैर प्रतिस्पर्धा समझौते के खत्म होने का इंतजार कर रही है।
टाटा कॉफी के प्रबंध निदेशक एम एच अशराफ ने बिजनेस स्टैन्डर्ड को बताया, ‘बरिस्ता के साथ किया गया गैर- प्रतिस्पर्धी समझौता अगले साल समाप्त होने जा रहा है। इसके बाद ही हम देश भर में कॉफी बार स्थापित करने के बारे में विचार करेंगे। हालांकि अभी तक इस परियोजना में निवेश की जाने वाली रकम और इन कॉफी बार के आकार के बारे में कुछ भी तय नहीं किया गया है।’
कॉफी उगाने वाली एशिया की सबसे बड़ी कंपनी टाटा कॉफी फिलहाल मिस्टर बीन कॉफी जंक्शन के जरिए पहले ही ब्रांडेड कॉफी का कारोबार करती है। मिस्टर बीन ने कोच्चि और कोयंबटूर में अपने आउटेलेट खोले हैं और कंपनी चेन्नई, पुडुचेरी समेत और तीन नए आउटलेट्स खोलने की योजना बना रही है।
मिस्टर बीन ना तो कोई कैफे है और ना ही कॉफी आउटलेट है। इसीलिए इसका मुकाबला कैफे कॉफी डे, बरिस्ता और कैफे मोचा से नहीं है। मिस्टर बीन में कंपनी ग्राहकों को उनके स्वाद के मुताबिक कॉफी पाउडर लेने की सुविधा मुहैया कराती है। मुंबई के एक विश्लेषक ने बताया, ‘100 आउटलेट्स की किसी भी कैफे शृंखला को खोलने के लिए 75-100 करोड़ रुपये के निवेश की ही जरूरत होती है।
इसमें निवेश और आउटलेट का आकार इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी किस जगह पर कितना निवेश करना चाहती है। अभी तक टाटा ने अपने कॉफी रिटेल परियोजना के बारे में औपचारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है इसीलिए उनके निवेश के बारे में कुछ भी कह पाना काफी मुश्किल हैं।’
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि नमक से लेकर सॉफ्टवेयर के कारोबार की दिग्गज कंपनी के लिए इस क्षेत्र में निवेश करना कोई समस्या नहीं होगी। साल 1996 में अपना पहला कॉफी आउटलेट खोलने वाली कैफे कॉफी डे के 110 शहरों में 650 कैफे हैं। यह देश की सबसे बड़ी कॉफी बार शृंखला है। बरिस्ता के भारत, श्रीलंका और पश्चिमी एशिया में लगभग 100 एस्प्रेस्सो बार हैं।
पिछले तीन साल में कॉफी की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। लेकिन घर से बाहर कॉफी पीने में 12-13 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है। कॉफी उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार भारत में हर साल लगभग 1 लाख टन कॉफी की खपत होती है।
साल 2001 में टाटा ने टर्नर मॉरिसन समूह से लगभग 26 करोड़ रुपये में बरिस्ता में हिस्सेदारी खरीदी थी। लेकिन तीन साल बाद टाटा ने अपनी हिस्सेदारी स्टर्लिंग इन्फोटेक समूह के शिवशंकरन को लगभग 65 करोड़ रुपये में बेची थी। इसके अलावा वह टर्नर मॉरिसन से बाकी हिस्सेदारी भी खरीद ली थी।
साल 2007 में स्टर्लिंग ने बरिस्ता को इतालवी कंपनी लवाजा को बेच दिया था। लवाजा काफी तेजी से भारत में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है। अमेरिका की एट ओ क्लॉक कॉफी कंपनी को खरीदने वाली टाटा कॉफी के दक्षिण भारत में लगभग 19 कॉफी एस्टेट हैं। कंपनी सालाना 10,000 टन अरेबिका और रोबस्टा कॉफी का उत्पादन करती है।