टाटा टी अब चाय से आगे बढ़कर खाद्य एवं पेय पदार्थ कंपनी होगी। आज कंपनी की आम वार्षिक बैठक के दौरान कंपनी के चेयरमैन रतन टाटा ने शेयर धारकों को संबोधित करते हुए कहा कि कंपनी अपनी उत्पाद शृंखला को पूरा करने के लिए अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश रही है।
अधिग्रहण के लिए टाटा टी की नजर किस तरह की कंपनी पर है इस बारे में अधिक जानकारी न देते हुए टाटा ने कहा कि ये अधिग्रहण नीतिगत होगा, जिससे हमारी क्षमताओं में मजबूती आएगी, कंपनी के साथ विदेशों में हमारी पहचान बढ़ेगी या कंपनी जो तकनीक का इस्तेमाल करती है, वहां तक हमारी पहुंच होगी।
उन्होंने कहा, ‘अधिग्रहण और विलय या निवेश किए जा सकते हैं, जो कारोबारी लिहाज से हमारे लिए ज्यादामहत्वपूर्ण हो सकते हैं।’ अधिग्रहण के साथ ही क्या टाटा टी अपना नाम बदल सकती है, इस सवाल पर टाटा ने कहा कंपनी सिर्फ एक चार कंपनी के अपने चोले को उतार कर बदल रही है और इस बारे में कंपनी ध्यान दे सकती है।
आम वार्षिक बैठक के दौरान टाटा टी के वाइस चेयरमैन आर के कृष्ण कुमार ने बताया कि कंपनी की नजर अमेरिका और रूस के बाजारों पर है और हो सकता है कि कंपनी अधिग्रहण के बारे में सोचे। इसके साथ ही टाटा टी अपनी सेहत से जुड़ी शृंखला को फैलाने और उसके विस्तार पर भी विचार करेगी। इस समय टाटा टी 45 देशों में 42 ब्रांडों के साथ वैश्विक कंपनी बन चुकी है।
पिछले कुछ वर्षों में टाटा टी और उसकी सहायक कंपनियां ब्रांडेड खाद्य पदार्थों की कंपनी के रूप में अपनी पहचान बनाने में लगी हुई हैं। कंपनी और उसकी सभी सहायक कंपनियों की कुल संचयी बिक्री 4,432 करोड़ रुपये है, जिसमें से 90 प्रतिशत कारोबार कंपनी की दुनियाभर में मशहूर ब्रांडेड चाय और कॉफी से मिला है। चाय बगानों से अलग होकर टाटा टी को मजबूती मिली है। रतन टाटा ने अपने शेयरधारकों से कहा, ‘जब हम चाय उगाते थे तब कारोबार में काफी उतार-चढ़ाव थे। इससे हमें बहुत ज्यादा या बड़ा नुकसान नहीं होने वाला।’