केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि असम में टाटा समूह का सेमीकंडक्टर संयंत्र स्वदेशी रूप से विकसित प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके प्रतिदिन 4.83 करोड़ चिप का उत्पादन करेगा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और टाटा संस लिमिटेड के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने शनिवार को मोरीगांव जिले के जागीरोड में 27,000 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर निर्माण और परीक्षण संयंत्र का भूमिपूजन किया। इस परियोजना को 29 फरवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।
वैष्णव ने कहा, ”परियोजना को मंजूरी मिलने के पांच महीने के छोटे से अंतराल में संयंत्र का निर्माण शुरू हो गया है। यह प्रतिदिन लगभग 4.83 करोड़ चिप का निर्माण करेगा। इस संयंत्र की खास बात यह है कि इस संयंत्र में इस्तेमाल की जाने वाली तीनों प्रमुख प्रौद्योगिकियां भारत में विकसित की गई हैं।”
मंत्री ने कहा कि टाटा संयंत्र में निर्मित चिप का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों सहित विभिन्न वाहनों में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संचार और नेटवर्क अवसंरचना, 5जी, राउटर आदि बनाने वाली हर बड़ी कंपनी इन चिप का उपयोग करेगी।
वैष्णव ने कहा, ”सेमीकंडक्टर एक बुनियादी उद्योग है। जब भी कोई सेमीकंडक्टर इकाई आएगी, तो बहुत सारे सहायक रोजगार सृजित होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि पारिस्थितिकी तंत्र इतना जटिल है कि मातृ इकाई के आते ही बहुत सारी इकाइयां आ जाती हैं।”
मंत्री ने आगे कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन का एक बड़ा हिस्सा 85,000 कुशल पेशेवरों को तैयार करना है और पूर्वोत्तर के नौ संस्थानों ने इस पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि असम में एनआईटी सिलचर, एनआईटी मिजोरम, एनआईटी मणिपुर, एनआईटी नागालैंड, एनआईटी त्रिपुरा, एनआईटी अगरतला, एनआईटी सिक्किम, एनआईटी अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में दो संस्थान – नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी और एनआईटी – सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए प्रतिभा विकास में शामिल हैं। वैष्णव ने कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री ने हमेशा “एक्ट ईस्ट” नीति पर जोर दिया है और हमारे सेमीकंडक्टर कार्यक्रम में एक बड़ा मील का पत्थर आज असम में हासिल किया गया है, जहां सेमीकंडक्टर इकाई का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।”