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मध्य प्रदेश में टाटा को मर्जी पड़ेगी महंगी

Last Updated- December 07, 2022 | 6:47 PM IST

नैनो परियोजना को सिंगुर से हटाने की रतन टाटा की धमकी के बाद तमाम राज्य सरकारों ने उन्हें अपने यहां आने का न्योता जरूर दिया है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि टाटा अपनी शर्तों पर राज्यों में पहुंचेंगे।


मध्य प्रदेश में तो कम से कम ऐसा नहीं होने जा रहा है। यदि वह अपना संयंत्र यहां लगाना चाहते हैं, तो उन्हें राजगढ़ इलाके में ही जाना होगा। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग 3 पर है और राजस्थान के साथ इसकी सीमा मिलती है।

सरकार के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पीथमपुर को वाहन निर्माता कंपनियों का गढ़ माना जाता है और यह राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है। लेकिन पीथमपुर में कहीं भी अब जमीन नहीं बची है। इसलिए टाटा की नैनो यहां बनना मुश्किल है।

इसके अलावा किसी अन्य औद्योगिक इलाके में भी राज्य सरकार के पास जमीन नहीं है।  इसका सीधा मतलब है कि यदि टाटा को यहां कारखाना लगाना है, तो उन्हें अपने दम पर जमीन का अधिग्रहण करना होगा, जो निवेश और सामाजिक मसलों के नजरिये से खासा महंगा साबित होगा।

सरकार के उद्योग विभाग में एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया, ‘राजगढ़ ही अकेली जगह है, जहां टाटा के लिए जमीन मिल सकती है।’ यह जमीन अभी विकसित नहीं हुई है और यहां घोड़ा पछाड़ नदी है। तकरीबन 12000 एकड़ जमीन वाले इस क्षेत्र में विकास के बाद टाटा को प्रति एकड़ के लिए कम से कम 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे। हां, अगर टाटा कहीं और जमीन अधिग्रहीत करना चाहते हैं, तो उन्हें प्रत्येक एकड़ के लिए 20 लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

First Published - August 27, 2008 | 12:00 AM IST

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