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टाटा को लोन से बिगड़ सकता है ग्रीन कैंपेन

Last Updated- December 07, 2022 | 4:44 PM IST

पश्चिम भारत में टाटा का अल्ट्रा मेगा पावर संयंत्र शुरू होते ही अपना नाम उन संयंत्रों में शुमार करा देगा जो दुनिया में ग्रीन हाउस गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करते हैं। लेकिन इससे विश्व बैंक को परेशानी हो सकती है।


साल 2012 से शुरू होने वाले इस संयंत्र को विश्व बैंक से भी आर्थिक मदद मिल रही है। वह भी तब जब एक साल पहले ही विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट जोएलिक ने जलवायु में हो रहे परिवर्तन को रोकने के लिए हर संभव मदद देने की घोषणा की थी। उनकी इस घोषणा के बाद भी विश्व बैंक दुनिया भर में जीवाश्म ईंधन आधारित परियोजनाओं को आर्थिक मदद दे रहा है।

अमेरिका के ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 178 अरब रुपये की लागत से लगने वाला यह कोयला आधारित संयंत्र सालाना टयूनीशिया से भी ज्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करेगा। विश्व बैंक ने अप्रैल में ही इस संयंत्र के लिए लगभग 1,935 करोड़ रुपये का लोन मंजूर किया था। इसके अलावा बैंक इस परियोजना में 215 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी भी खरीद सकता है।

विश्व बैंक विकासशील देशों की परियोजनाओं को ऐसे समय में आर्थिक मदद दे रहा है जबकि अमेरिका विकासशील देशों से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने का दबाव बना रहा है। इस मामले में विवाद भी है। विश्व बैंक के निदेशक मंडल में अमेरिका के  पास सबसे ज्यादा वोट हैं। बैंक के निदेशक मंडल में अमेरिका के पास ही वीटो पावर है और उसके पास बैंक के करारों में बदलाव और बैंक का अध्यक्ष चुनने का भी अधिकार है।

First Published - August 13, 2008 | 12:53 AM IST

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