प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वोडाफोन आइडिया (वीआई) के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये में 27 फीसदी की कमी कर, इसे 64,046 करोड़ रुपये करने का केंद्र सरकार का फैसला, वोडाफोन आइडिया के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। इस क्षेत्र के विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि इस फैसले से तीसरे पायदान पर मौजूद दूरसंचार परिचालक कंपनी को बैंकों से जरूरी ऋण जुटाने और अपने नेटवर्क में निवेश करने में मदद मिलेगी।
विश्लेषकों के अनुसार, 5जी को लगातार अपनाने की रफ्तार, डेटा उपयोग में वृद्धि और टैरिफ में बढ़ोतरी की दिशा में कदम उठाने से कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है। हालांकि वे यह भी चेतावनी देते हैं कि अगले वित्त वर्ष से पहले के वर्षों में स्पेक्ट्रम खरीद से संबंधित भुगतान आने शुरू होंगे और इसके लिए कंपनी को अपनी कमाई (एबिटा) तेजी से बढ़ानी होगी।
उद्योग के एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, ‘इससे निकट भविष्य के खर्चों में थोड़ी राहत मिलती है जिससे अप्रत्यक्ष रूप से स्पेक्ट्रम बकाये के भुगतान और नेटवर्क निवेश के लिए पूंजी को मुक्त करने में मदद करती है।’ वोडाफोन आइडिया का इरादा 25,000 करोड़ रुपये, बैंकों से ऋण के माध्यम से और 10,000 करोड़ रुपये गैर-ऋण सुविधाओं से जुटाने का है और इसका इस्तेमाल अगले तीन वर्षों में 45,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च योजना को पूरा करने के लिए किए जाएंगे। इस योजना का उद्देश्य कंपनी को एक रणनीतिक पुनर्गठन के तहत पुनर्जीवित करना है, जिसमें नेटवर्क विस्तार, लाभप्रदता और ग्राहक बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
एजीआर भुगतान को अगले 10 वर्षों में कुल 1,144 करोड़ रुपये तक सीमित किया गया है जबकि बड़ा दबाव अब पिछले वर्षों में किए गए स्पेक्ट्रम खरीद से संबंधित भुगतान का होगा जिसे वित्त वर्ष 2027 से हर साल चुकता करना होगा। दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने एजीआर बकाये का दोबारा मूल्यांकन किया और इसे 31 दिसंबर, 2025 तक अंतिम रूप दे दिया, जिसमें निर्धारित राशि पर कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा और इसे वित्त वर्ष 2041 तक चुकता करना होगा।