प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
वोडाफोन आइडिया (वी) के शीर्ष प्रबंधन को भरोसा है कि बैंकों के साथ चल रही उसकी बातचीत कंपनी में इक्विटी डालने के प्रवर्तकों के फैसले के बाद सफल रहेगी। बैंकों के समूह का नेतृत्व भारतीय स्टेट बैंक कर रहा है। वोडाफोन आइडिया देश की तीसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी है। प्रबंधन को नहीं लगता कि इक्विटी डालने तथा अचानक आई देनदारी के लिए कंटिंजेंट लायबिलिटी एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (क्लैम) समझौता करने के बाद निदेशक मंडल में किसी तरह का बदलाव होगा।
कंपनी के मुख्य कार्य अधिकारी अभिजित किशोर ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के नतीजे घोषित करने के बाद आज कहा, ‘रकम जुटाने के लिए स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले समूह के साथ हमारी लगातार बातचीत हो रही है। समूह में सार्वजनिक बैंक, निजी बैंक और विदेशी बैंक भी शामिल हैं और हमें भरोसा है कि बातचीत जल्द पूरी हो जाएगी।’ वी 35,000 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बातचीत कर रही है। इसमें 25,000 करोड़ की वित्तीय सहायता होगी और 10,000 करोड़ रुपये की रकम गैर-वित्तीय सहायता या ऋण सुविधा के रूप में होगी। किशोर ने यह बताने से इनकार कर दिया कि बातचीत कब तक पूरी हो जाएगी।
वी अगले तीन साल में 5 जी नेटवर्क शुरू करने और होड़ भरे उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 45,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय करने की सोच रही है। अपना रसूख बढ़ाने के लिए वह दो अंकों में आय बढ़ाने, परिचालन मुनाफा तीन गुना करने और ग्राहकों को लगातार जोड़ते रहने के लक्ष्य पर काम करेगी। इस लिहाज से यह पूंजी जुटाना बहुत जरूरी है।
कंपनी ने शनिवार को कहा कि आदित्य बिड़ला समूह तरजीही निर्गम के जरिये वी में 4,730 करोड़ रुपये डालेगा। निर्गम के तहत सिंगापुर की कंपनी सूर्यजा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड को 430 करोड़ तक वारंट जारी किए जाएंगे। इसमें से लगभग 25 फीसदी रकम तुरंत चुका दी जाएगी और बाकी रकम 18 महीनों में दी जाएगी। इसके साथ ही कंपनी प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 3.82 फीसदी बढ़ जाएगी। अभी उनकी हिस्सेदारी 9.6 फीसदी है। आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को इसी महीने वोडाफोन आइडिया का गैर कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया है, जिसके बाद यह फैसला किया गया है।
निदेशक मंडल और हिस्सेदारी में बदलाव के बारे में विश्लेषकों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ’मुझे नहीं लगता कि निदेशक मंडल के ढांचे में किसी तरह की तब्दीली होने जा रही है। इन कदमों से साबित होता है कि प्रवर्तक समूह हमारी दीर्घकालिक वृद्धि के लिए कितनी ज्यादा और लगातार मदद कर रहा है।’
पिछले साल दिसंबर में निपटारे के लिए संशोधित क्लैम समझौते के तहत वी को वोडाफोन पीएलसी से 5,836 करोड़ रुपये मिलेंगे। सबसे पहले यह समझौता वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के विलय के दौरान 2017 में किया गया था।