देश में श्वेत क्रांति का झंडा लहारने के बाद गुजरात की डेयरी सहकारी कंपनियां अपने इस प्रयास को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
राज्य की कई डेयरी सहकारी कंपनियों ने कारोबार को पेशेवर रूप देने और विभिन्न डेयरियों में दूध का प्रबंधन करने के लिए सॉफ्टवेयर लगाने के लिए हाथ मिलाया है। हो सकता है कि इस सॉफ्टवेयर विक्रेता के चुनाव के लिए गुजरात सहकारी दुग्ध मार्केटिंग महासंघ (सीजीएमएमएफ) संयोजक की भूमिका निभाए।
महासंघ दुग्ध संघ के सदस्यों की मदद सॉफ्टवेयर को खरीदने में भी कर सकता है। डेयरी सहकारी कंपनियों का मकसद विभिन्न चरणों में सॉफ्टवेयर की पहुंच लगभग 13 हजार समितियों तक बढ़ाने की है। इस प्रणाली के जरिये केंद्रीकृत डैटा तैयार किया जाएगा, जिसकी मदद से दुग्ध संघ कारोबार पर नजर रख सकेंगे। इसके अलावा दूध के कारोबार के खाते ऑन-लाइन हो जाएंगे।
चूंकि अभी इस मामले पर योजनाएं बनाई जा रही हैं, संघों के सदस्यों को उम्मीद है कि अगले कुछ महीने में इसे लागू भी कर लिया जाएगा। सुरेंद्रनगर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (सुरसागर डेयरी के नाम से लोकप्रिय) के मुख्य कार्यकारी धीरज चौधरी का कहना है, ‘हमें सरकार को लेखा-परीक्षण की लागत का भुगतान करना होगा।
ऑन-लाइन के मामले में, सरकार के लिए भी गांव समीतियों के लिए लेखा-परीक्षण करना आसान हो जाएगा। अभी तक तो योजनाएं चल रही हैं और प्रोग्रामिंग समिति सॉफ्टवेयर प्रोग्राम पर काम कर रही है।’ इस मामले से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि दुग्ध संघ सहकारी समितियों को यह प्रोग्राम खरीदने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी भी मुहैया कराएंगी और हर दुग्ध संघ अपनी समिति के प्रतिनिधियों को पांच दिना का प्रशिक्षण भी देगा।