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कंपनियों की आय पर पड़ सकता है असर

Last Updated- December 11, 2022 | 6:22 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बुधवार को की गई 50 आधार अंक की दर वृद्धि से आगामी तिमाहियों में कॉरपोरेट मुनाफा प्रभावित हो सकता है।
इसकी वजह यह है कि भारतीय उद्योग जगत को केंद्रीय बैंक द्वारा मई 2020 में नीतिगत दर रिकॉर्ड 4 प्रतिशत पर किए जाने के बाद से वित्त वर्ष 2021, वित्त वर्ष 2022 में ब्याज दरों में गिरावट और कोविड-17 महामारी के बाद नकदी में इजाफा होने का लाभ मिला है।
कुल मिलाकर, बिजनेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2021, वित्त वर्ष 2022 में ब्याज दर में गिरावट की वजह से करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बचत की, जिससे भारतीय उद्योग जगत के मुनाफे को मजबूती ​मिली। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय उद्योग जगत का ब्याज बोझ कम हो गया, भले ही कुल कॉरपोरेट उधारी में भारी इजाफा दर्ज किया गया।
बैंकिंग, वित्तीय सेवा एवं बीमा (बीएफएसआई) को छोड़कर सूचीबद्ध कंपनियों के लिए संयुक्त ब्याज बोझ वित्त वर्ष 2020 और वित्त वर्ष 2022 के बीच 7.3 प्रतिशत घट गया, हालांकि उधारी में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। यह विश्लेषण बीएसई-500, बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप सूचकांकों में शामिल 963 कंपनियों (बीएफएसआई को छोड़कर) के सामान्य नमूने पर आधारित है। नूमने में शामिल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 के अंत में 36.08 लाख करोड़ रुपये की ऊंची सकल उधारी दर्ज की, जो 35.12 लाख करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत तक ज्यादा है। हालांकि उनका संयुक्त ब्याज भुगतान वित्त वर्ष 2022 में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत घटकर 2.51 करोड़ रुपये रह गया जो वित्त वर्ष 2021 में 2.59 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2020 में 2.71 लाख करोड़ रुपये था।
इन गैर-बीएफएसआई कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2022 में सालाना आधार पर 63.6 प्रतिशत बढ़ा, भले ही उनका परिचालन लाभ सालाना आधार पर महज 27.4 प्रतिशत बढ़ा, और संयुक्त शुद्ध बिक्र में 31.1 प्रतिशत की तेजी आई। आय वृद्धि में तेजी ब्याज खर्च में सालाना आधार पर 3.1 प्रतिशत की कमी और मूल्यह्रास में 7.3 प्रतिशत की नरमी की वजह से आई।
वर्ष 2020 में आरबीआई द्वारा नीतिगत दर में दो बार लगातार कटौती के साथ साथ नकदी डाले जाने से ब्याज दरों में भारी कमी को बढ़ावा मिला और इससे सभी लेनदारों को फायदा हुआ।
उदाहरण के लिए, बेंचमार्क 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल वित्त वर्ष 2021 में घटकर 5.96 प्रतिशत रह गया, जो एक दशक में सबसे कम है। कॉरपोरेट उधारी लागत में कमी भी तेज थी, क्योंकि पिछले दो साल में इसमें 177 आधार अंक की कमी आई और यह वित्त वर्ष 2020 के 8.82 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2022 में 7.05 प्रतिशत पर रह गई।
भारतीय उद्योग जगत की उधारी लागत वित्त वर्ष 2022 में एक दशक में सबसे कम थी और इसका कॉरपोरेट लाभ के लिहाज से सकारात्मक असर पड़ा।
विश्लेषकों का कहना है कि दर वृद्धि के बाद ब्याज बोझ बढ़ने से गैर-वित्तीय कंपनियों के लिए दोहरी समस्या हो जाएगी, क्योंकि उन्हें कच्चे माल की कीमतों और ऊर्जा कीमतों में गिरावट से पहले से ही जूझना पड़ रहा है। जेएम इंस्टीट्यूशनल इ​क्विटी में प्रबंध निदेशक एवं मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2023 में कुल लागत चालू वित्त वर्ष के शुरू में बाजार द्वारा जताए गए अनुमान के मुकाबले 15-20 प्रतिशत कम रहेगी। आय पर कई कारकों का प्रभाव पड़ेगा।’

First Published - June 10, 2022 | 12:34 AM IST

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