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जिनका काम से न हो लगाव और न मन तो दें उनको प्रोत्साहन

Last Updated- December 11, 2022 | 2:31 PM IST

‘मैं थक चुका हूं। सच बोलूं तो बस इतना ही कहूंगा।’ यह बात नई दिल्ली में एक प्रमुख भारतीय आईटी कंपनी में काम करने वाले एक जूनियर इंजीनियर ने कही। उन्होंने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर 23 वर्षीय इंजीनियर ने कहा कि वह कई बातों से नाखुश हैं: अपने गृह शहर भोपाल से वर्क फ्रॉम होम का विकल्प होने के बावजूद दफ्तर बुलाना, उम्मीद से कम वेतन वृद्धि और काम के अतिरिक्त घंटों का कोई श्रेय न मिलना। इसलिए उन्होंने अपनी रफ्तार न बढ़ाने और केवल जरूरत के मुताबिक न्यूनतम काम करने का निर्णय लिया।
एक अन्य इंजीनियर का नजरिया भी बिल्कुल ऐसा ही है। बेंगलूरु की एक स्टार्टअप में काम कर रहे 26 वर्षीय इंजीनियर ने कहा, ‘मैं अपने नियोक्ता की अपेक्षाओं को पूरा करने पर ध्यान नहीं देता बल्कि अब केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करता हूं ताकि हर महीने वेतन मिल जाए।’ वह अब अधिक छुट्टियां भी लेने लगे हैं ताकि कंपनी के लिए किए गए अतिरिक्त घंटों की भरपाई हो सके।
ये दोनों इंजीनियर कामकाजी दुनिया में ‘क्वाइट क्विटर्स’ कहे जाने वालों के उदाहरण हैं। बेमन से काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया ऐप टिकटॉक पर यह शब्द गढ़ा गया है। 
वैश्विक महामारी के बाद निचले और मझोले स्तर के कर्मचारियों में यह प्रवृत्ति दिख रही है। आईटी और स्टार्टअप क्षेत्र में ऐसे अधिक लोग दिख रहे हैं जो निरुत्साहित हैं अथवा अपने काम के प्रति उनका लगाव कम हो रहा है। वे काम तो कर रहे हैं लेकिन केवल जरूरत भर के।
कर्मचारियों के बीच पनप रही इस प्रवृत्ति से चिंतित कई कंपनियां अलग तरीके से सोचने लगी हैं ताकि इस समस्या का समाधान हो सके। इसके लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है ताकि ऐसे कर्मचारियों के कामकाज की सराहना की जा सके और उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके। उदाहरण के लिए ‘रिकॉग्निशन नाउ’ नाम से एक ऐप के जरिये प्रबंधक अपने सहकर्मियों और टीम सदस्यों के कामकाज की सराहना सीधे उनके ईमेल हैंडल के जरिये कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें किसी अन्य ऐप पर जाने की आवश्यकता नहीं होती है।
बीआई वर्डवाइड ने यह ऐप तैयार किया है। बीआई वर्ल्डवाइड के सीईओ सुकेश जैन ने कहा, ‘आजकल कामकाज की सराहना तत्काल करने की आवश्यकता है। पहले कर्मचारियों के योगदान की सराहना मासिक अथवा तिमाही आधार पर की जाती थी।’ आईबीएम, लेनोवो और जेनपैक्ट जैसी प्रमुख कंपनियां इसके ग्राहक हैं।
एक अन्य ऐप ‘इक्विटी ऐंड रिकॉग्निशन एडवाइजर’ भी है जो एक ही टीम के सदस्यों को बार-बार सराहना करने के पूर्वग्रह को दूर करता है। इसके अलावा ‘रिकॉग्निशन एडवाइजर’ प्रबंधक को उनके टीम के सदस्यों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करता है।
जैन ने कहा, ‘युवाओं के बीच कंपनी छोड़ने की दर अधिक दिख रही है। वे अपनी सुविधा के अनुकूल कंपनी अथवा रोजगार प्रोफाइल चुनना चाहते हैं। इन्हीं लोगों के कारण कर्मचारियों को श्रेय देने, प्रोत्साहित करने और बेहतर तालमेल संबंधी कार्यक्रम कंपनियों की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल जो गए हैं।’
कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों में नई ऊर्जा भरने के लिए अतिरिक्त समय भी दे रही हैं। उदाहरण के लिए, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो ने हाल में अपने कर्मचारियों को 11 दिनों की छुट्टी दी थी। पेटीएम इनसाइडर की एचआर प्रमुख दीप्ति गोयल ने कहा, ‘कर्मचारियों के साथ लगाव का पारंपरिक नजरिया आज के समय के लिहाज से उपयुक्त नहीं है। हमें अपनी टीम में नई ऊर्जा भरने के वास्ते अपने नजरिये में बदलाव करने और बेहतर लगाव के लिए तत्काल परिणाम देने की आवश्यकता है।’
इन्फोसिस ने वैश्विक महामारी के दौरान अपने कर्मचारियों के साथ लगाव को बेहतर करने पर ध्यान दिया था। इन्फोसिस के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं एचआर प्रमुख रिचर्ड लोबो ने कहा, ‘इन्फोसिस में सीखने, कर्मचारी अनुभव, स्वास्थ्य एवं कल्याण, करियर एवं अन्य  लाभों के लिए हमारे नवाचार जारी हैं। हमने हाइब्रिड मॉडल के तहत अपने मैनेजरों की क्षमता को बेहतर करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। इसके लिए उन्हें लगातार फीडबैक और प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि टीम के लिए उनके बेहतर अनुभव की झलक मिल सके।’ 
टीसीएस ने भी कर्मचारियों के साथ जुड़ाव के लिए अपने नजरिये और प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। कंपनी के उपाध्यक्ष एवं एचआर प्रमुख डीपी नांबियार ने कहा, ‘वैश्विक महामारी के दौरान कर्मचारी के अनुभव को समग्र सुरक्षा एवं कल्याण के लिए तैयार करने से लेकर नई सामान्य स्थिति में ‘उद्देश्य के साथ जुड़ाव’ पर ध्यान दिया जा रहा है।’ 

First Published - September 30, 2022 | 9:58 PM IST

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