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इंपीरियल, एक्सॉन पर हिंदुस्तानी मुहर लगने में अभी देर

Last Updated- December 07, 2022 | 7:00 PM IST

भारतीय मीडिया में पिछले दो दिनों में दो प्रमुख कॉर्पोरेट सौदे सुर्खियों में रहे हैं।


ब्रिटेन की सॉफ्टवेयर कंपनी एक्सॉन ग्लोबल पर इन्फोसिस का कब्जा और तेल-गैस क्षेत्र की कंपनी इंपीरियल एनर्जी के अधिग्रहण के ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) के ऐलान से मंदी की मार सह रहे कॉर्पोरेट जगत के चेहरे पर मुस्कान फैल गई है।

लेकिन कहानी में अभी पेच बाकी है और इन दोनों विलायती कंपनियों पर भारतीय कब्जे की बात तकनीकी रूप से अभी सही नहीं मानी जा सकती। दरअसल ब्रिटेन के कानून में कुछ ऐसे प्रावधान हैं, जिनकी वजह से दोनों दिग्गज भारतीय कंपनियों की यह ‘फतह’ खटाई में पड़ सकती है।

इन कानूनों के मुताबिक किसी भी ब्रिटिश कंपनी के मालिकान अगर कंपनी की हिस्सेदारी बेचने का फैसला करते हैं, तो उन्हें शेयरधारकों को इस पर विचार करने के लिए 45 दिन का वक्त देना पड़ेगा। शेयरधारक इस सौदे को नकार भी सकते हैं और इस पर रजामंदी की मुहर भी लगा सकते हैं।

लेकिन सबसे खतरनाक बात यह है कि 45 दिन के दरम्यान कोई भी दूसरी कंपनी हिस्सेदारी खरीदने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकती है। इंपीरियल और एक्सॉन के साथ भी ऐसा ही है। ओवीएल और इन्फोसिस के ऐलान के बाद से ही 45 दिन की उलटी गिनती शुरू हो गई है और उसके साथ ही किसी दूसरी कंपनी की दावेदारी यानी काउंटर बिड का खतरा भी गहराता जा रहा है।

इंपीरियल के मामले में तो पहले से ही ऐसा कहा जा रहा है। ओवीएल की सहायक कंपनी जार्पेनो लिमिटेड ने इसकी 15 फीसद हिस्सेदारी के लिए 1,250 पेंस प्रति शेयर की बोली लगाई है। लेकिन बाजार में यह सुगबुगाहट जोरों पर है कि चीन की पेट्रोलियम दिग्गज साइनोपेक ओवीएल को मात देने के लिए तैयार खड़ी है।

माना जा रहा है कि 45 दिन का समय पूरा होने से पहले ही साइनोपेक काउंटर बिड के साथ मैदान में आ जाएगी। ब्रिटिश प्रावधानों के मुताबिक यदि ओवीएल की बोली से 10 फीसद ज्यादा कीमत यानी 1,375 पेंस प्रति शेयर की बोली लेकर कोई दूसरी कंपनी आ जाती है, तो दोनों कंपनियों के प्रमुखों के बीच हुआ अधिग्रहण का समझौता अपने आप रद्द हो जाएगा।

एक्सॉन के साथ भी कुछ ऐसा ही मामला है। वहां तो काउंटर बिड का खतरा इतना ज्यादा है कि इसके चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में मंगलवार के कारोबार में इन्फोसिस के शेयर ही गिर गए। इन्फोसिस इस कंपनी को तकरीबन 3,300 करोड़ रुपये में खरीद रही है।

लेकिन लंदन की एक सिक्योरिटीज फर्म ने काउंटर बिड की संभावना के बारे में महज एक छोटा सा बयान दिया और इन्फोसिस के शेयरों में 1.7 फीसद की गिरावट आ गई। इसके उलट काउंटर बिड की खबर ने एक्सॉन के शेयरों में पंख लगा दिए।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज में मंगलवार को ही कंपनी के शेयरों में 20.9 फीसद का उछाल दर्ज किया गया। काउंटर बिड खतरा है। अधिग्रहण के कई प्रयास इससे नाकाम हुए हैं और ऐसा हश्र इन्फोसिस, ओवीएल की कोशिशों का भी हो सकता है।

अंग्रेजी पेचों में फंस सकती हैं हिंदुस्तानी कोशिशें

ब्रिटिश कानून के मुताबिक शेयरधारक करेंगे सौदे पर आखिरी फैसला
शेयरधारक सौदे पर हां या न कहने में लेंगे 45 दिन का वक्त
इस दौरान कोई भी कंपनी कर सकती है काउंटर बिड
काउंटर बिड के लिए 10 फीसद ज्यादा कीमत लगाना जरूरी
इंपीरियल की काउंटर बिडिंग के लिए चीनी कंपनी साइनोपेक की तैयारी

First Published - August 27, 2008 | 11:23 PM IST

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