विमानन क्षेत्र में उतार-चढ़ाव का असर ऑनलाइन ट्रेवल पोर्टलों की मार्जिन पर भी पड़ा है। अक्टूबर से विमानों की टिकट बुकिंग पर एजेंटों की कमीशन समाप्त हो जाएगी।
ऐसे में घाटे से बचने के लिए ये ट्रेवल पोर्टल अब ऑनलाइन बस बुकिंग की पेशकश कर रहे हैं। देश के तेजी से उभर रहे ऑनलाइन ट्रेवल पोर्टलों में से एक इजीगो ने अपने बस सर्च टूल के लॉन्च की घोषणा की है।
यह टूल भारत में बस ऑपरेटरों और बस बुकिंग साइट्स की तलाश, तुलना और बस टिकटों की बुकिंग में सक्षम है। इस टूल के इस्तेमाल के जरिये एक ही छत के नीचे प्रमुख साइटों की तुलना की जा सकेगी।
बस के भी सर्च इंजन
इजीगो ने इस सेवा की पेशकश के लिए टिकटवाला, रेडबस और टिकट-गूज ऑनलाइन बस बुकिंग साइटों के साथ भागीदारी की है। इजीगो के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी आलोक बाजपेई ने कहा, ‘ऑनलाइन बस बुकिंग के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। हम बस ऑपरेटरों के व्यापक आधार की तलाश के लिए अपने भागीदारों के साथ मिल कर काम करेंगे और भारतीय उपभोक्ताओं को और अधिक व्यापक एवं सक्षम बस टिकट सर्च इंजन की पेशकश करेंगे।’
ऑनलाइन बस बुकिंग भारत में तकरीबन 18 महीने पहले शुरू हुई थी। इसका बाजार तकरीबन 15,000 करोड़ रुपये का है और महीना दर महीना इसमें 20 फीसद का इजाफा हो रहा है। फिलहाल बस बुकिंग कुल ऑनलाइन ट्रेवल बुकिंग सेगमेंट के 0.01 फीसदी से भी कम है।
नुकसान की भरपाई
टिकटवाला के मुख्य कार्यकारी हरानाथ लोकनाधाम कहते हैं कि टिकटवाला ने जुलाई 2007 से अब तक तकरीबन 20 लाख लेनदेन किए हैं। यात्रा और जूमत्रा ट्रेवल पोर्टलों ने भी ऑनलाइन बस बुकिंग की राह पर चलना शुरू कर दिया है। ऑनलाइन बस बुकिंग एयर बुकिंग से खत्म होने जा रही पोर्टलों की आमदनी की भरपाई करेगी।
औसत रूप से ट्रेवल पोर्टल बस ऑपरेटरों से टिकट की कीमत की 10-20 फीसदी राशि कमीशन के तौर पर लेते हैं। वहीं एयरलाइन बुकिंग के लिए यह 5 फीसदी से कम है।
विस्तार की गुंजाइश
जूमत्रा के निदेशक विकास जावा ने कहा, ‘सभी ट्रेवल पोर्टलों की नजरें बस बाजार पर हमेशा से टिकी रही हैं, लेकिन यह भी असंगठित बना हुआ है। महज कुछ कंपनियां ही इस उद्योग को संगठित बनाए जाने के लिए काम कर रही हैं। इससे ऑनलाइन कंपनियों के लिए आसानी होगी।
ट्रेवल पोर्टलों को फायदे में बने रहने के लिए व्यापक रेंज के उत्पादों की पेशकश किया जाना जरूरी है और बसें इस रेंज का स्पष्ट रूप से विस्तार हैं।’ भारत के कुल ट्रेवल बाजार में ट्रेवल पोर्टल 12-14 फीसदी का दबदबा रखते हैं जिसके 2010 तक बढ़ कर 20-30 फीसदी पहुंच जाने की संभावना है।