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मोरबी में आ गई मुसीबत की ‘घड़ी’

Last Updated- December 07, 2022 | 7:05 PM IST

घड़ी निर्माता कंपनियों का गढ़ मोरबी का वक्त मुश्किल होने लगा है। पहले चीन से जबरदस्त टक्कर मिलने के बाद, मोरबी का घड़ी उद्योग अब घड़ियों के लिए मांग में गिरावट के एक और चुनौती का सामना कर रहा है।


पिछले 6 महीनों में घड़ियों की मांग में अहम गिरावट देखे जाने के साथ कई इकाइयों ने अपने उत्पादन को 35 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है। कच्चे माल की बढ़ती लागत निर्माताओं की मुश्किलों को और बढ़ा रही हैं।

मुख्य कच्चे माल जैसे प्लास्टिक, धातु, रसायन और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की कीमत लगभग 25 से 35 प्रतिशत तक बढ़ी है। इसके अलावा परिवहन की अधिक लागत ने भी घड़ी निर्माताओं के लिए परिस्थितियों को मुश्किल कर दिया है। सिर्फ दो साल पहले ही एक दिन में 2 लाख से अधिक घड़ियों का उत्पादन अब आधा रह गया है।

मोरबी घड़ी और पुर्जा निर्माताओं के संघ के अध्यक्ष शशांग डांगी ने कहा, ‘दीवार घड़ी का उत्पादन मोरबी में कम हो चुका है। घड़ी निर्माता कंपनियां बढ़ती लागत का सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत ही वसूल कर पा रही है।’ दो साल पहले मोरबी में एक दिन में लगभग 2 लाख घड़ियों का उत्पादन किया जाता था, अब यह आंकड़ा आधा हो गया है।

हालांकि घड़ी निर्माताओं को उम्मीद है कि त्योहारों का मौसम आने से बिक्री में कुछ इजाफा होगा। एक प्रमुख घड़ी निर्माता ने कहा, ‘पहले दीवार घड़ी को तोहफा देने के लिहाज से देखा जाता था। अब यह बदल चुका है। एक तरह से घड़ियों को अब सेल फोनों और अन्य दूसरे तोहफों से भी मुकबला करना पड़ रहा है।

First Published - August 29, 2008 | 10:58 PM IST

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