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भर्तियों में तेजी के बीच अनिश्चितता

Last Updated- December 11, 2022 | 2:05 PM IST

वी प्रसाद (बदला हुआ नाम) आंध्र प्रदेश के करनाल में इंजीनियरिंग के छात्र हैं। जवाहरलाल नेहरू टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय में पढ़ रहे प्रसाद को विप्रो कंपनी की तरफ से जनवरी 2022 में ऑफर लेटर दिया गया था, जिसमें उन्हें जून-जुलाई के बीच कंपनी में शामिल करने को कहा गया था। लेकिन वह अभी तक कंपनी के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं।  
प्रसाद ने कहा कि मेरे लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि दिसंबर-जनवरी से पढ़ने के लिए लिए गए ऋण की किस्त शुरू हो जाएगी। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि जनवरी 2022 में कंपनी द्वारा जून-जुलाई से नौकरी शुरू करने के लिए कहा गया था, लेकिन अभी तक इसकी कोई सूचना नहीं दी गई है।
लगभग 200 छात्रों को विप्रो द्वारा चयनित किया गया था,और सभी चयनित छात्रों की यही स्थिति है। विप्रो से दिए गए ऑफर लेटर की कुल संख्या को सत्यापित करने के लिए विश्वविद्यालय से स्वतंत्र रूप से संपर्क नहीं किया जा सका है। 
 कई छात्रों ने सोशल मीडिया जैसे ट्विटर और लिंक्डइन पर भी इस उम्मीद से पोस्ट करना शुरू कर दिया कि शायद इस मुद्दे पर उनके सार्वजनिक विरोध से कंपनियां फिर से सोचने पर मजबूर हो जाएं। छात्रों को डर था कि ये कंपनियां ऑफर लेटर को भी रद्द करने की योजना बना रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह भी कहा है कि ऑफर लेटर रद्द कर दिए गए हैं। इन छात्रों द्वारा नामित कुछ कंपनियों में विप्रो, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और इन्फोसिस शामिल हैं। हालांकि, कंपनियों ने इस बात से इनकार किया कि वे इस ऑफर को रद्द कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी भर्ती में थोड़ी देरी हो रही है।  
नियोजक और भर्ती विशेषज्ञों के मुताबिक, उन्होंने आईटी कंपनियों द्वारा ऑफर लेटर को बड़े पैमाने पर रद्द करने के बारे में नहीं सुना है। हालांकि वे उम्मीद करते हैं कि भर्ती प्रक्रिया में देरी होगी। कई लोगों ने यह भी कहा कि इससे अगले वित्त वर्ष-2024 के लिए काम पर रखने के लक्ष्य प्रभावित होंगे।
एक विशेषज्ञ स्टाफिंग फर्म, एक्सफेनो के सह-संस्थापक कमल कारंथ ने कहा कि पिछले 12 महीनों में आवश्यकता से अधिक भर्ती चल रही थी, जिसमें उन्होंने वेतन और मध्यम प्रबंधन पदोन्नति को भी आगे बढ़ाया। व्यवसाय की मात्रा की प्रत्याशा में, इन कंपनियों ने छोटे-मंझोले शहरों और और परिसरों में भी अपनी पहुंच बनाई। लेकिन अब वे श्रमगत लागत का लाभ उठा रहे हैं। यह अगली दो तिमाहियों में इसे कुछ हद तक जारी रहने की संभावना है, जो धीमी होगी। 
 

First Published - October 5, 2022 | 9:50 PM IST

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