मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने चेताया है कि कमजोर वैश्विक वृद्धि, अधिक मुद्रास्फीति और ब्याज दरों की वजह से भविष्य में ऊर्जा की मांग पर दबाव पैदा हो सकता है। इससे इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को नुकसान हो सकता है। तेल से लेकर दूरसंचार तक के क्षेत्र में काम करने वाली दिग्गज कंपनी के प्रबंधन ने शुक्रवार को कंपनी परिणाम के बाद एक सम्मेलन में यह आशंका जताई है।
अपने तेल से रसायन वाले प्रमुख खंड में कमजोर प्रदर्शन की वजह से आरआईएल ने 30 सितंबर, 2022 (दूसरी तिमाही) को समाप्त होने वाली तिमाही में 13,656 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया है।
कुल शुद्ध लाभ एक साल पहले की अवधि के 13,680 करोड़ रुपये के तकरीबन बराबर स्तर पर रहा, जो विश्लेषकों के पूर्वानुमानों से काफी कम है। इस तिमाही में कंपनी का शुद्ध राजस्व सालाना आधार पर 37.3 प्रतिशत बढ़कर 2.3 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो बाजार के अनुमान से कुछ अधिक है।
कंपनी के प्रबंधन ने कहा कि अस्थिर ऊर्जा बाजार और 1 जुलाई से परिवहन ईंधन पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) लगाए जाने से फर्म के लाभ पर असर पड़ा है।
आरआईएल के संयुक्त मुख्य वित्तीय अधिकारी वी श्रीकांत ने कहा कि कुल मिलाकर जीडीपी वृद्धि में कमजोरी, मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति, ब्याज लागत, ये सभी निश्चित रूप से चिंता के क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि ब्याज दरें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। हालांकि चीन का निर्यात कोटा बाजारों में अच्छी आपूर्ति बनाए रखेगा।
पिछले सप्ताह चीन ने व्यापार में तेजी लाने के लिए परिष्कृत ईंधन निर्यात को बढ़ाकर 1.5 करोड़ टन कर दिया था। इस कोटे में 1.325 करोड़ टन परिष्कृत उत्पाद और 17.5 लाख टन कम गंधक वाला जहाज ईंधन शामिल है। इन परिष्कृत उत्पादों में पेट्रोल, डीजल और विमानन टर्बाइन ईंधन शामिल हैं।
आरआईएल ने दूसरी तिमाही के अपने परिणामों के बाद निवेशक प्रस्तुति में कहा कि आने वाले महीनों में उसे तेल की मांग प्रतिदिन औसतन 9.96 करोड़ बैरल प्रतिदिन नजर आ रही है, जो एक साल पहले की तुलना में 1.9 प्रतिशत अधिक है। यह जुलाई-सितंबर की अवधि के दौरान नजर आए प्रतिदिन 10 करोड़ बैरल की तुलना में अब भी कम है।