कोविड की गंभीरता घटने और सैनिटाइजर जैसे उत्पादों की मांग में अहम गिरावट आने से विप्रो कंज्यूमर केयर ऐंड लाइटिंग बाजार से सैनिटाइजर को हटाने के बारे में विचार कर रही है। विप्रो कंज्यूमर केयर के सीईओ विनीत अग्रवाल ने कहा कि कंपनी अन्य श्रेणियों के भी उन कुछेक उत्पादों को हटा सकती है, जिन्हें महामारी के दौरान जरूरत पूरी करने के लिए उतारा गया था। हालांकि उन्होंने उन उत्पादों का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया, जिन्हें बाजार से हटाया जाएगा।
अग्रवाल ने कहा, ‘जिस एकमात्र उत्पाद को बाजार से हटाया जा सकता है, वह सैनिटाइजर है।’ उन्होंने कहा, ‘साफ तौर पर सैनिटाइजर से हमें वित्त वर्ष 2021 और 2022 में अच्छी कमाई हुई है। लेकिन अब इसकी मांग लगभग शून्य हो गई है। हमने जो अन्य श्रेणियां, कुछ प्रकार शुरू किए थे, उन्हें भी हटाया जाएगा।’ कंपनी अधिग्रहण के जरिये उन बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने के बारे में विचार कर रही हैं, जिनमें उसकी पहले ही मौजूदगी है। संतूर साबुन बनाने वाली यह कंपनी फिलिपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे विकासशील देशों में अपनी जड़ें मजबूत करने के बारे में विचार कर रही है।
अग्रवाल ने कहा, ‘हम इन देशों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए वहां और अधिग्रहणों पर विचार कर सकते हैं।’ कंपनी भारत में भी अधिग्रहणों की संभावनाएं तलाशेगी। उन्होंने कहा, ‘अच्छी बात यह है कि इस साल मार्च-अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू हो गई हैं, इसलिए हम विभिन्न कंपनियों का बेहतर तरीके से आकलन कर पाएंगे।’ कंपनी जिन अधिग्रहणों की योजन बना रही है, वे पर्सनल केयर, स्किनकेयर और होम केयर जैसी मौजूदा श्रेणियों में होंगे।
कंपनी की निवेश इकाई ने विप्रो कंज्यूमर केयर वेंचर्स के तहत भारत में सात कंपनियों में निवेश किया है और उसका कुल निवेश 100 करोड़ रुपये से थोड़ा ही कम है। अग्रवाल ने कहा, ‘हम उस फंड के प्रदर्शन से खुश हैं। अब हम दक्षिण-पूर्व एशिया खास तौर पर वियतनाम और इंडोनेशिया में निवेश करने को तैयार हैं।’
विप्रो कंज्यूमर केयर वेंचर केवल स्टार्टअप में हिस्सेदारी खरीदती है।
यह इन कंपनियों को चलाने के लिए अधिग्रहीत नहीं करना चाहती है। यह उभरते रुझानों की बेहतर समझ के लिए इन कंपनियों के अनुभवों से सीखना चाहती है। कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2022 में 8,630 करोड़ रुपये रहा। कंपनी को 52 फीसदी राजस्व अंतरराष्ट्रीय परिचालन और 48 फीसदी भारतीय कारोबार से प्राप्त होता है। अग्रवाल ने कहा कि इसके संतूर ब्रांड का राजस्व पिछले साल 2,000 करोड़ रुपये को पार कर गया क्योंकि यह भारत में दूसरा सबसे बड़ा साबुन ब्रांड बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बाजार हिस्सेदारी के लिहाज से संतूर पांच राज्यों में पहले पायदान पर है। ये राज्य आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात हैं।