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ADB India growth forecast FY27: एशियाई विकास बैंक (ADB) ने शुक्रवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष (FY27) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान है, जो मजबूत घरेलू मांग के कारण स्थिर बनी रहेगी। अगले वित्त वर्ष (FY28) में यह बढ़कर 7.3% तक पहुंच सकती है। ADB ने अपनी ‘एशियन डेवलपमेंट आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में लंबा संघर्ष भारत की अर्थव्यवस्था को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। इसमें ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, व्यापार में बाधाएं और प्रवासी भारतीयों से आने वाले धन (रेमिटेंस) में कमी शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, FY28 में विकास दर 7.3% तक पहुंच सकती है, जिसका कारण घरेलू सुधार, यूरोपीय संघ (EU) के साथ व्यापार समझौते का फायदा और सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संभावित बढ़ोतरी है। ADB ने दिसंबर 2025 में FY27 के लिए 6.5% की वृद्धि दर का अनुमान लगाया था, जिसे अब बढ़ाकर 6.9% कर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई चालू वित्त वर्ष में 2.1% से बढ़कर 4.5% तक जा सकती है। इसकी वजह खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और कीमती धातुओं के दाम में बढ़त है। अगले वित्त वर्ष में महंगाई घटकर 4% रहने का अनुमान है, क्योंकि तेल की कीमतें कम हो सकती हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले वित्त वर्ष (FY26) में 7.6% की दर से वृद्धि की, जो FY25 के 7.1% से अधिक थी। यह वृद्धि मजबूत खपत, टैक्स में राहत, कम खाद्य कीमतों और सरकारी निवेश के कारण संभव हुई। ADB ने कहा कि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत की वृद्धि दर मजबूत बनी रहेगी। इसे घरेलू मांग, आसान वित्तीय स्थितियां और अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर कम टैरिफ से समर्थन मिलेगा।
हालांकि, बढ़ती महंगाई, खासकर खाद्य और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष में खपत पर असर पड़ सकता है। लेकिन अगले वित्त वर्ष में घरेलू मांग मजबूत होने से अर्थव्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा।
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EU के साथ व्यापार समझौते (FTA) से निर्यात में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे बाहरी मांग मजबूत होगी। पश्चिम एशिया संकट के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है, चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और उत्पादन लागत बढ़ने से विकास दर पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का कितना असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
ADB ने कहा कि अगर सरकार कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डालती, तो महंगाई और विकास पर असर कम हो सकता है, लेकिन इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ जाएगा।