अर्थव्यवस्था

किसानों को बड़ी राहत: युद्ध के बीच भी नहीं बढ़ेंगे खाद के दाम, सरकार का बड़ा ऐलान

पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक की वैश्विक कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत सरकार सब्सिडी बढ़ाकर खाद के खुदरा दामों को स्थिर रखेगी, ताकि किसानों पर बोझ न पड़े

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असित रंजन मिश्र   
संजीब मुखर्जी   
Last Updated- April 26, 2026 | 9:36 PM IST

पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक सब्सिडी के बढ़ते बोझ के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को संकेत दिए कि सरकार किसानों के लिए उर्वरक की खुदरा कीमत यथावत बनाए रख सकती है, जैसा कि कोविड महामारी के दौरान रखा गया था। 

मुंबई में इकनॉमिक टाइम्स की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा, ‘क्या हमने कोविड के दौरान ऐसा नहीं किया था? जब विदेश में उर्वरक की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भी हमने उन्हें उन कीमतों पर खरीदा और यह सुनिश्चित किया कि आपूर्ति में कोई व्यवधान न हो। किसानों पर बढ़ी कीमत का बोझ नहीं डाला गया। किसानों ने पहले जैसी ही कीमत चुकाई। हमने कभी भी बोझ उन पर नहीं डाला।’

मार्च की शुरुआत से यूरिया की वैश्विक कीमतें  460 डॉलर प्रति टन से करीब 85 प्रतिशत बढ़कर लगभग 850 डॉलर प्रति टन हो गई हैं। वहीं डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमत 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़कर लगभग 850 से 1,000 डॉलर प्रति टन हो गई है। यूरिया और डीएपी भारत में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले दो उर्वरक हैं।

पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक की कीमतों में तेज वृद्धि के बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को खरीफ 2026 के लिए पोषक तत्व पर आधारित सब्सिडी (एनबीएस) व्यवस्था के तहत गैर-यूरिया उर्वरकों के लिए प्रति किलो सब्सिडी दरों में खरीफ 2025 की तुलना में 10 से 21 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है।  सरकार के इस कदम से खजाने पर लगभग 41,534 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है, जो पिछले सीजन की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है।

भारत में यूरिया की कुल जरूरतों का 20 से 30 प्रतिशत और डीएपी आयात का 30 प्रतिशत खाड़ी देशों से आता है। वहीं खाड़ी देशों से देश में करीब आधा एलएनजी आयात होता है, जो यूरिया उत्पादन में महत्त्वपूर्ण है। अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल फॉस्फेट वाले और पोटाश वाले उर्वरकों के उत्पादन में कच्चे माल के रूप में होता है और टकराव के कारण इनकी आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। 

अगर वैश्विक कीमतों में तेजी जारी रहती है तो वित्त वर्ष 2027 में भारत पर उर्वरक सब्सिडी का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि कारोबारियों और बाजार हिस्सेदारों ने कहा कि तात्कालिक जरूरतें पूरी करने के लिए इस समय पर्याप्त भंडार मौजूद है।

 वित्त वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में सरकार ने उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये आवंटन किया था, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान 1.86 लाख करोड़ रुपये से 8.4 प्रतिशत कम है। वित्त वर्ष 2026 का संशोधित अनुमान ही बजट अनुमान से 11 प्रतिशत से अधिक था, जो बढ़ी हुई कीमतों पर यूरिया और डीएपी की रिकॉर्ड खपत को दर्शाता है।

आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 तक उर्वरक सब्सिडी पर खर्च पहले ही 1.88 लाख करोड़ रुपये पार कर गया है, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान से अधिक है। 

उर्वरक का घरेलू उत्पादन भी घटा है। मार्च 2026 में यूरिया का उत्पादन सालाना आधार पर लगभग 27 प्रतिशत घटकर लगभग 18 लाख टन रह गया, जबकि फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों का उत्पादन 16 से 24 प्रतिशत घटकर लगभग 9 से 10 लाख टन रह गया।

First Published : April 26, 2026 | 9:36 PM IST