वाणिज्य विभाग वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) के साथ काम कर रहा है, जिससे सेवाओं पर सेक्टर के मुताबिक आंकड़ों के संकलन की संभावनाओं की तलाश की जा सके। इसका मकसद ऐसे समय में ट्रेड डेटा को व्यापक बनाना है, जब भारत कई देशों के साथ व्यापार समझौते पर बात कर रहा है।
सेवा कारोबार को मापने की प्रक्रिया जटिल है। यह वस्तुओं के आयात-निर्यात आंकड़ों की तरह व्यापक नहीं है। इस समय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सेवाओं के निर्यात और आयात के आंकड़े जारी करता है और यह दो महीने पर जारी होता है। निर्यातकों का कहना है कि प्रायः विभिन्न तरह की सेवाओं के आंकड़ों का आच्छादन हो जाता है। इसकी वजह से सेक्टरों का वर्गीकरण चुनौतीपूर्ण बन जाता है। इससे नीति निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होती है, खासकर ऐसे समय में, जब सरकार ने 2030 तक 1 लाख करोड़ डॉलर की सेवाओं के निर्यात का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘वाणिज्य विभाग सूचना तकनीक संचालक जीएसटी-जीएसटीएन के साथ पिछले 3 महीने से बातचीत कर रहा है, जिससे सेवा क्षेत्र के डेटा की जानकारी एकत्र की जा सके। अगर इस पर काम हो जाता है तो तेजी से आंकड़े मिल सकते हैं (एक माह के भीतर)।’डेलॉयट इंडिया में पार्टनर एमएस मणि ने कहा, ‘जीएसटीएन डेटा में में न सिर्फ कर संग्रह शामिल है, बल्कि एचएसएन/एसएसी (हार्मोनाइज्ड सिस्टम आफ नॉमनक्लेचर फॉर गुड्स/सर्विस एकाउंटिंग कोड फॉर सर्विसेज) डेटा भी सेवाओं के कारोबार प्रवाह का काफी विश्वसनीय बैरोमीटर है।
इसका इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों के नीति संबंधी निर्णय लेने में भी हो सकता है। इन आकड़ों का इस्तेमाल विभिन्न सेवा क्षेत्रों पर सरकार की किसी पहल के असर के आकलन में भी हो सकता है और खासकर निर्यात पर केंद्रित सेवा क्षेत्र की जरूरतों के मुताबिक इसमें संशोधन भी हो सकता है।’
इंडियन काउंसिल फार रिसर्च आन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस (इक्रियर) में प्रोफेसर अर्पिता मुखर्जी ने कहा कि वाणिज्य विभाग और जीएसटीएल के बीच सेवा के कारोबार के आंकड़ों को संकलित करने को लेकर चल रही बातचीत स्वागत योग्य है। बहरहाल एक अंतर मंत्रालयी डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क बनाए जाने की जरूरत है।
सर्विस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एसईपीसी) के चेयरमैन सुनील एच टालाटी ने कहा, ‘भारत इस समय विभिन्न देशों के साथ एफटीए पर बातचीत कर रहा है। अभी हेल्थकेयर या शिक्षा सेवा जैसे सेक्टरों के द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े हैं। रिजर्व बैंक अभी निर्यात संवर्धन परिषद के साथ आंकड़ों को साझा नहीं करता है क्योंकि आंकड़ों को साझा करने को लेकर कानून नहीं है। परिणामस्वरूप हम डेटा के लिए अन्य स्रोतों (जैसे ओईसीडी) का जिक्र करते हैं।’
भारत का सेवाओं का निर्यात 2021-22 के दौरान 254 अरब डॉलर पहुंच गया है और इस अवधि के दौरान 421 अरब डॉलर के वस्तुओं का निर्यात हुआ था।