देश के 8 बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के उत्पादन में वृद्धि दर मार्च में घटकर 5 माह के निचले स्तर 3.6 प्रतिशत पर रह गई। इसे प्रमुख क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इन 8 में से 7 क्षेत्रों के उत्पादन में वित्त वर्ष 23 के आखिरी महीने में गिरावट आई है।
उद्योग विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक कोयला (12.2 प्रतिशत) को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में क्रमिक आधार पर वृद्धि कम हुई है।
प्राकृतिक गैस (2.8 प्रतिशत), रिफाइनरी उत्पाद (1.5 प्रतिशत), उर्वरक (9.7 प्रतिशत) और स्टील (8.8 प्रतिशत) की वृद्धि दर पिछले महीने की तुलना में कम हुई है।
वही सीमेंट (-0.8 प्रतिशत) और बिजली (-1.8 प्रतिशत) के उत्पादन में पिछले महीने की तुलना में कमी आई है। कच्चे तेल के उत्पादन में लगातार दसवें महीने संकुचन आया है और मार्च में इसके उत्पादन 2.8 प्रतिशत की कमी
आई है।
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि प्रमुख क्षेत्र के उत्पादन में मार्च में गिरावट की वजह यह है कि सिर्फ कोयला और कच्चे तेल के उत्पादन में पिछले माह की तुलना में सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘कुछ क्षेत्रों में उत्पादन बेमौसम बारिश की वजह से प्रभावित हो सकती है, जिसमें बिजली व सीमेंट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसमें मार्च महीने में सालाना आधार पर संकुचन आया है। वहीं कोयला, उर्वरक और स्टील में विस्तार उत्साहजनक है।’
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च में प्रधान अर्थशास्त्री सुनील सिन्हा ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा पूंजीगत व्यय करने से स्टील क्षेत्र को बढ़ावा मिला है। साथ ही चीन में गतिविधियां बढ़ने से इसे बल मिला है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 8 प्रमुख उद्योगों का अधिभार 40.27 प्रतिशत होता है और इसका आईआईपी पर उल्लेखनीय असर पड़ता है।
नायर ने कहा, ‘इन आंकड़ों के साथ मार्च महीने में आईआईपी वृद्धि में 3 से 4 प्रतिशत गिरावट की उम्मीद है।’
पिछले सप्ताह नैशनल काउंसिल फार अप्लायड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) ने अपने ताजा बिजनेस एक्सपेक्टेशन सर्वे में कहा था कि लगातार तीन तिमाही तक चली कमजोरी के बाद वित्त वर्ष 23 की चौथी तिमाही में कारोबारी धारणा में तेजी आई है और कारोबारी विश्वास सूचकांक (बीसीआई) चौथी तिमाही में बढ़कर 149.7 पर पहुंच गया है, जो चौथी तिमाही में 126.6 पर था।