उद्योगों के क्षेत्र में कर्ज में वृद्धि 8 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। भारत की कंपनियां संपत्ति बेचकर कर्ज निपटाने के चरण से बाहर निकलती नजर आ रही हैं। बैंकों के ब्याज में बढ़ोतरी की तुलना में बॉन्ड प्रतिफल बहुत तेजी से बढ़ने के कारण कंपनियां धन की जरूरतों के लिए बैंकों का रुख कर रही हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के हाल के आंकड़ों के मुताबिक सूक्ष्म, लघु और मझोले और बड़े उद्योगों को दिया जाने वाला ऋण बढ़कर जुलाई के अंत तक 31.82 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.5 प्रतिशत ज्यादा है। यहां तक कि पिछले माह की तुलना में इसमें 0.4 प्रतिशत और साल से अब तक (वाईटीडी) के आधार पर इसमें करीब 1 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। बैंकिंग उद्योग के कुल गैर खाद्य कर्ज में 27.7 प्रतिशत कर्ज उद्योगों को मिला है। इसके पहले उद्योगों को दिए जाने वाले कर्ज में इस तरह की बढ़ोतरी मई 2014 में हुई थी, जब कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज में 11 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई थी।
सूक्ष्म और छोटे उद्योगों को दिया जाने वाला कर्ज पिछले साल की तुलना में 28.3 प्रतिशत और मझोले उद्योगों का कर्ज 36.8 प्रतिशत बढ़ा है। बड़े उद्योगों के कर्ज में 5.2 प्रतिशत वृद्धि हुई है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्रवार उधारी की स्थिति देखें तो पेट्रोलियम, लोहा और स्टील, पेट्रोकेमिकल्स और खनन उद्योगों की कर्ज में वृद्धि में अहम भूमिका है।
वहीं दूसरी तरफ दूरसंचार, कपड़ा, खाद्य, प्रसंस्करण और अन्य बुनियादी ढांचे ने आंशिक गति दी है। इक्रा में फाइनैंशियल सेक्टर रेटिंग्स के वीपी अनिल गुप्ता ने कहा, ‘बैंकों के फंड आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) की सीमांत लागत की तुलना में बॉन्ड प्रतिफल तेजी से बढ़ा है। और शायद इसलिए उद्योग जगत फंड के लिए पूंजी बाजारों से बैंकिंग सेक्टर की ओर जाने के लिए प्रेरित हुआ है। साथ ही जबसे फेडरल रिजर्व ने दरों में बढ़ोतरी शुरू की है, भारतीय कंपनियों की विदेश में उधारी महंगी हुई है, जिसककी वजह से वे घरेलू ऋण ले रहे हैं।
बॉन्ड प्रतिफल स्थिर होने के बाद यह धारणा बदल सकती है।’कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था में कुल कर्ज में बढ़ोतरी का प्रतिबिंब होता है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि बैंक का कर्ज 13 अगस्त तक 15.3 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि एक साल पहले 6.5 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।
फेडरल बैंक के कार्यकारी निदेशक आशुतोष खजूरिया ने कहा, ‘इस धारणा से पता चलता है कि कुल मिलाकर कर्ज में वृद्धि 15 प्रतिशत से ज्यादा है और सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों की उधारी में ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है, एनपीए की समस्या का समाधान हो गया है और जैसे जैसे अर्थव्यवस्था में रिकवरी हो रही है, उद्योग जगत अपने क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ाने को तैयार है।’