facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

पूंजीगत खर्च में गिरावट: छोड़ी गई परियोजनाओं का मूल्य पहुंचा 15 ट्रिलियन रुपये

Advertisement

India capital expenditure: पूर्ण और छोड़ी गई परियोजनाओं के बीच 8.1 ट्रिलियन रुपये का यह अंतर निवेश साइकिल में लगातार बना हुआ है।

Last Updated- February 16, 2024 | 4:47 PM IST
Economic Survey 2025: India needs to increase investment on infrastructure in the next two decades भारत को अगले दो दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाने की जरूरत

दिसंबर 2023 को समाप्त होने वाली चार तिमाहियों में छोड़े गए पूंजीगत खर्च (capex) प्रोजेक्ट का मूल्य पूर्ण प्रोजेक्ट के मूल्य से दोगुना से ज्यादा हो गया। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों से पता चलता है कि पूरी की गई परियोजनाएं कुल 6.9 ट्रिलियन रुपये की थीं, जबकि छोड़ी गई परियोजनाएं (dropped projects) 15 ट्रिलियन रुपये की थीं। पूर्ण और छोड़ी गई परियोजनाओं के बीच 8.1 ट्रिलियन रुपये का यह अंतर निवेश साइकिल में लगातार बना हुआ है।

दिसंबर 2009 का सबसे पुराना डेटा बताता है कि पूरी हो चुकी परियोजनाओं का मूल्य छोड़ी गई परियोजनाओं (dropped projects) की तुलना में थोड़ा कम था।

क्या हैं छोड़ी गई परियोजनाएं (dropped projects)?

छोड़ी गई परियोजनाओं (dropped projects) में वे परियोजनाएं शामिल हैं जिन्हें छोड़ दिया गया है, बंद कर दिया गया है, रुकी हुई हैं, या जिनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

Capex का मतलब सड़कों, कारखानों और अन्य लॉन्ग टर्म एसेट में निवेश से है। सरकार विकास को बढ़ावा देने के लिए अधिक पूंजीगत व्यय को पुश कर रही है और इसने बड़े पैमाने पर देश में अतिरिक्त निवेश को प्रेरित किया है, हालांकि हाल के महीनों में यह पुश धीमा हो गया है।

Also Read: साल की दूसरी छमाही में भारत में दो बार दरों में कटौती की उम्मीद: गोल्डमैन सैक्स

हाल के दिनों में, सरकार समर्थित छोड़ी गई परियोजनाओं का मूल्य प्राइवेट सेक्टर की तुलना में अधिक रहा है। यह प्राइवेट सेक्टर की कम गतिविधि के कारण हो सकता है या सरकार ने उन परियोजनाओं को छोड़ने का निर्णय लिया है जो ठीक नहीं थीं।

दिसंबर 2023 को समाप्त चार तिमाहियों में, सरकार ने 8 ट्रिलियन रुपये की परियोजनाएं छोड़ दीं, जबकि निजी क्षेत्र ने 7.1 ट्रिलियन रुपये की परियोजनाएं छोड़ीं।

दिसंबर 2023 में, छोड़ी गई मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाएं 4.4 ट्रिलियन रुपये की थीं, जो दिसंबर 2019 में 2.5 ट्रिलियन रुपये थी। इसने छोड़ी गई बिजली परियोजनाओं को पीछे छोड़ दिया, जो महामारी से पहले दूसरी सबसे बड़ी कैटेगरी थी।

दिसंबर 2019 से पहले, छोड़ी गई बिजली परियोजनाएं कुल मिलाकर लगभग 5.3 ट्रिलियन रुपये थीं। दिसंबर 2019 में, सेवाओं की छोड़ी गई परियोजनाओं में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 7.8 ट्रिलियन रुपये थी, जो तब से घटकर 4 ट्रिलियन रुपये हो गई है।

सेवा क्षेत्र, जो भारत की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख हिस्सा है, के पिछले साल की तुलना में 2023-24 में अधिक धीमी गति से बढ़ने की उम्मीद है।

Advertisement
First Published - February 16, 2024 | 4:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement