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दफ्तर में जाने वालों की कम हुई तादाद

Last Updated- December 12, 2022 | 6:42 AM IST

कोविड-19 संक्रमण के मामले में तेजी आने से महामारी की दूसरी लहर की आशंका बढ़ गई है जिसका अंदाजा कुछ आर्थिक सुधार वाले संकेतकों पर पडऩे वाले असर से भी हो रहा है जिसका जायजा बिज़नेस स्टैंडर्ड साप्ताहिक आधार पर लेता है। गूगल लोकेशन डेटा को छोड़कर सभी डेटा 21 मार्च के हैं क्योंकि यह एक अंतराल के साथ जारी किया जाता है और यह आंकड़े 16 मार्च के हैं।
वैश्विक लोकेशन तकनीक कंपनी टॉमटॉम इंटरनैशनल के आंकड़ों के मुताबिक नई दिल्ली में यातायात की तादाद सामान्य से 15 फीसदी कम है। देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में कोविड-19 के मामले में बढ़ोतरी की वजह से यातायात में 37 प्रतिशत तक की कमी दिख रही है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन भी गिर गया है। प्रदूषक तत्त्वों का उत्सर्जन औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों से आता है। दिल्ली में इसमें 16 प्रतिशत की कमी है। ये आंकड़े 2019 की तुलना में हैं क्योंकि पिछले साल लॉकडाउन का असर रहा जिसकी शुरुआत मार्च 2020 से ही हो गई थी। मुंबई में प्रदूषक गैसों के उत्सर्जन की दर में तेज गिरावट है।
सर्च इंजन कंपनी गूगल इस बात का जायजा लेने के लिए लोकेशन डेटा का इस्तेमाल करता है कि महामारी के दौरान लोगों की गतिविधि कहां और कैसी थी। यह विभिन्न स्थानों को वर्गीकृत कर यह देखता है कि महामारी से पहले के दौर की तुलना में लोगों की आवाजाही में किस तरह अंतर आया है। ताजा आंकड़ों से यह पता चलता है कि लोग घर पर ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। साल के शुरुआती महीने में लोगों के दफ्तर जाने की तादाद में सुधार आया था लेकिन एक बार फिर दफ्तर जाने वालों की संख्या घट रही है।
पिछले सप्ताह की तुलना में भारतीय रेलवे द्वारा की जाने वाली माल ढुलाई की वृद्धि कम रही। यह पहले के 18.5 प्रतिशत से कम होकर 10.5 प्रतिशत हो गया। माल ढुलाई से होने वाली आमदनी की वृद्धि 17.8 फीसदी से कम होकर 11.3 फीसदी हो गई है। हालांकि, बिजली उत्पादन कुछ उन संकेतकों में है जिनमें ज्यादा बदलाव नहीं दिख रहा है। साल 2019 में 14 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में बिजली उत्पादन की वृद्धि 11.1 फीसदी थी। लेकिन अब यह 11.8 प्रतिशत है। लॉकडाउन की सख्ती के दिनों में इसमें गिरावट देखी गई थी जब दफ्तर और कारखाने बंद हो गए थे।   
बिज़नेस स्टैंडर्ड भारतीय रेलवे द्वारा की जा रही माल ढुलाई, प्रदूषण के स्तर, देश में होने वाले बिजली उत्पादन की मात्रा, यातायात और लोगों के अपने घरों से बाहर निकलने के रुझान (अनाम स्थान डेटा का इस्तेमाल कर) का जायजा लेता है। ये आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन कैसा है। वैश्विक स्तर पर भी विश्लेषक इसी तरह के आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं जब से विभिन्न देशों में लॉकडाउन लगाने का रुझान बढ़ा। आधिकारिक वृहद आंकड़े देर से जारी होते हैं। ऐसे में इन संकेतकों से यह समझने में मदद मिलती है कि अर्थव्यवस्था की जमीनी स्थिति क्या है।

First Published - March 23, 2021 | 10:58 PM IST

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