facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

E-Way Bill: फरवरी में ई-वे बिल की वृद्धि में आई कमी

Advertisement

जनवरी में रिकॉर्ड 11.8 करोड़ ई-वे बिल जारी होने के बाद, फरवरी में यह घटकर 11.1 करोड़ रह गया। मांग और आपूर्ति में गिरावट के संकेत, जीएसटीएन डेटा के अनुसार।

Last Updated- March 06, 2025 | 10:50 PM IST
Trucks

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) पोर्टल द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वस्तुओं के अंतरराज्यीय और राज्यों के भीतर परिवहन के लिए व्यवसायों द्वारा निकाली गई इलेक्ट्रॉनिक परमिट या ई-वे बिल फरवरी में सालाना आधार पर घटकर 14.7 फीसदी हो गई जबकि जनवरी में यह 23.1 फीसदी थी।

लगातार तीन महीने तक बढ़ने और जनवरी में 11.8 करोड़ के रिकॉर्ड को छूने के बाद फरवरी में ई-वे बिलों की संख्या घटकर 11.1 करोड़ हो गई। ई-वे बिल 50,000 रुपये से अधिक के मूल्य के माल की आवाजाही के लिए अनिवार्य होता है और यह अर्थव्यवस्था में मांग और आपूर्ति के रुझानों के लिए शुरुआती संकेतक है। यह अक्सर कुछ समय बाद वृहद आर्थिक संकेतकों में दिखाई देता है।

राज्य के भीतर ई-वे बिल फरवरी में 7.2 करोड़ थे जबकि अंतरराज्यीय ई-वे बिल इस महीने के दौरान 3.9 करोड़ रहा। जीएसटीएन के डेटा के मुताबिक करीब 1.5 करोड़ पंजीकृत जीएसटी खिलाड़ी हैं और अब तक कुल 5.8 अरब ई-वे बिल जारी किए जा चुके हैं।

ई-वे बिल का प्रदर्शन एचएसबीसी इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के अनुरूप है जो फरवरी में 14 महीने के निचले स्तर 56.3 के स्तर पर चला गया जो जनवरी में 57.7 के स्तर पर था। हालांकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार के कारण सेवा पीएमआई फरवरी में बढ़कर 59 पर चला गया जबकि जनवरी में यह 26 महीने के निचले स्तर 56.5 पर था।

बुधवार को जारी एक निजी कारोबारी सर्वेक्षण के मुताबिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार के चलते भारत में दबदबे वाले सेवा क्षेत्र में फरवरी में वृद्धि देखी गई क्योंकि भारतीय कंपनियों के ऑर्डर में भी तेजी देखी गई। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के आंकड़ों के मुताबिक फरवरी में सभी श्रेणी में मंदी का आलम दिखा क्योंकि वाहन बाजार में 7 फीसदी की सालाना गिरावट दिखी।

Advertisement
First Published - March 6, 2025 | 10:50 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement