कोरोना महामारी और इसके कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण पूरी दुनिया में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई है। इसके कारण दुनिया भर में आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ रही है। अधिकतर अर्थशास्त्री पहले से ही मंदी की आशंका जता रहे हैं। अब इसमें एक और अर्थशास्त्री का नाम जुड़ गया है। जाने माने अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ने पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी की आशंका को लेकर सचेत किया है।
दिसंबर में शुरू हो सकती है आर्थिक मंदी
अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी ने आगाह किया है कि मंदी की शुरुआत दिसंबर 2022 में हो सकती है जो अगले साल के दिसंबर तक रहेगी। उन्होंने कहा कि इस दौरान अमेरिकी बाजार में काफी गिरावट देखी जा सकती है। S&P 500 30 प्रतिशत तक गिर सकता है और अगर मंदी तेज रही तो यह 40 प्रतिशत तक भी पहुंच सकता है।
2008 की मंदी को लेकर सटीक भविष्यवाणी
अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी जाने माने अर्थशास्त्री और Roubini Macro Associates के CEO तथा Chairman हैं। पहले भी वो 2007-08 में अमेरिका में आई भीषण को लेकर पहले ही भविष्यवाणी कर चुके हैं। उन्हें Dr. Doom के नाम से जाना जाता है। उन्होंने कहा कि मंदी के दौरान महंगाई पर काबू पाना बहुत मुश्किल होगा।
क्या होती है आर्थिक मंदी
जब कोई चीज लंबे समय तक सुस्त पड़ जाती है या फिर ठहर जाती है तो उसे मंदी कहा जाता है। अगर किसी देश की आर्थिक गतिविधि कम हो जाती है या फिर ठहर जाती है तो उस देश में आर्थिक मंदी की संज्ञा दी जाती है। अगर लगातार 2 तिमाही GDP ग्रोथ में कमी देखी जाए तो अर्थशास्त्र में उसे आर्थिक मंदी कहा जाता है।
क्या भारत में भी आ सकती है आर्थिक मंदी
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में आर्थिक मंदी के सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि भारत में आर्थिक मंदी का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि कई जानकार इसपर सवाल खड़े करते हैं। भारत पहले भी कई बार आर्थिक मंदी का सामना कर चुका है। रिजर्व बैंक के डाटा के अनुसार भारत में आजादी के बाद चार बार आर्थिक मंदी आई है। साल 1958, 1966, 1973 और 1980 में भारत आर्थिक मंदी का सामना कर चुका है। सबसे पहले मंदी आजादी के कुछ साल बाद ही आई थी जब देश की GDP growth rate -1.2 प्रतिशत पर पहुंच गया था।