माल एवं सेवा कर (GST) अधिनियम को करदाताओं के लिए और आसान बनाने के लिए सरकार ऐसे दंडात्मक अपराधों को इससे हटाने पर विचार कर रही है जो भारतीय दंड संहिता Indian Penal Code (IPC) के दायरे में पहले से ही आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा होने से GST संबंधी मुकदमें भी कम हो जाएंगे और बिजनेस में भी आसानी होगी।
यह प्रस्ताव GST कानून के दायरे से कुछ अपराधों को बाहर करने की कवायद के तहत लाया गया है और GST Council की अगली बैठक में इसे रखे जाने की संभावना है।
प्रस्ताव को जीएसटी परिषद की मंजूरी मिल जाती है तो वित्त मंत्रालय जीएसटी कानून में संशोधन का प्रस्ताव देगा जिसे अगले महीने से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में रखा जाएगा।
‘जीएसटी कानून के दायरे से अपराध को बाहर करने की कवायद के तहत Law committee ने CGST Act, 2017 के अंतर्गत धारा 132 में बदलावों को अंतिम रूप दे दिया है।’
लॉ फर्म रस्तोगी चैम्बर्स के अभिषेक ए. रस्तोगी ने कहा, ‘समिति का यह प्रस्ताव स्वागत योग्य है, इससे सजा की दर में कमी आएगी।’
Trilegal के पार्टनर Meyyappan N ने कहा कि इससे मुकदमेंबाजी में कमी आएगी और अधिक ठोस निश्चित फ्रेमवर्क को बढ़ावा मिलेगा। जिससे बिजनेस में अधिक स्पष्टता दिखाई देगी।
I P Pasricha & Company के पार्टनर मनीत पाल सिंह ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि GST कानून को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के बाद नकली बिल, बिना सही इनवॉइस के सामान और सर्विसेज की आपूर्ति करने और बिना सामान की आपूर्ति के बिल बनाना आदि को हटाया जा सकता है। इसके साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए नकली बिल बनाने को भी IPC के तहत कवर किया जा सकता है।
Meyyappan ने कहा कि इस कानून के आने से नियामकों के बीच आपस में खींचातानी नहीं होगी। जबकि, GST के अंतर्गत आने वाले अपराध के लिए IPC में अधिक कठोर कानून के प्रावधान किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी के लिए सात साल तक की सजा हो सकती है, जबकि जीएसटी में समान अपराध के लिए 5 साल की सजा है। वहीं, मौजूदा समय में जीएसटी की धारा 132 के तहत टैक्स चोरी कितनी बड़ी है, उसके मुताबिक सजा सुनाई जाती है।