उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति संभवत: सितंबर में ही उच्चतम स्तर पर पहुंच गई और स्थिति में सुधार होने और अनुकूल आधार प्रभाव के कारण आगे इसमें गिरावट आ सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत की आर्थिक स्थिति रिपोर्ट में यह संभावना व्यक्त की गई है। खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में 7.4 फीसदी पर पहुंच गई थी। इसके साथ ही आरबीआई ने आगाह किया है कि महंगाई के खिलाफ लड़ाई लंबे समय तक चलेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति को 4 फीसदी के लक्ष्य के अनुरूप लाने की राह में दो पड़ाव हैं, पहले इसे 6 फीसदी के सहज स्तर के नीचे लाना होगा और फिर इसे कम कर लक्षित दायरे के मध्य स्तर पर लाना होगा।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्र सहित केंद्रीय बैंक के अधिकारियों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है, ‘महामारी और भू-राजनीतिक झटकों की वजह से मुद्रास्फीति में धीरे-धीरे कमी आएगी। लेकिन मुद्रास्फीति में नरमी से उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। इससे निवेश और निर्यात के मोर्चे पर भारत की प्रतिस्पर्द्धा में सुधार होगा। हालांकि रिपोर्ट में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और यह आरबीआई की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
आरबीआई ने सितंबर में रीपो दर में 50 आधार अंक का इजाफा किया था और इस साल अभी तक रीपो दर में 190 आधार अंक की बढ़ोतरी की जा चुकी है। केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति घटकर 5 फीसदी से नीचे आ सकती है और 4 फीसदी के स्तर पर आने में दो साल का वक्त लग सकता है। आरबीआई ने मुद्रास्फीति को 2 फीसदी घट-बढ़ के साथ 4 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘मौजूदा अनिश्चितताओं को देखते हुए मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई कड़ी और लंबी चलेगी।’ अगर आरबीआई मुद्रास्फीति को 4 फीसदी से नीचे लाने में सफल रहता है तो यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत की संभावनाओं को मजबूत करेगा। रिपोर्ट के अनुसार ऐसा होने पर विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, बाजार में स्थिरता आएगी और वित्तीय स्थायित्व भी सुरक्षित होगा।
रिपोर्ट देश की विकास संभावनाओं के बारे में आश्वस्त दिखाई देती है क्योंकि देखा गया है कि व्यापक आर्थिक गतिविधियां लचीली बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक गतिविधियां घरेलू मांग में तेजी के साथ विस्तार की ओर अग्रसर हैं क्योंकि कई क्षेत्रों में सुधार देखा जा रहा है। मजबूत ऋण वृद्धि और सुदृढ़ बहीखाते अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं।