चीन, बांग्लादेश और इटली जैसे देशों से मांग में कमी के कारण भारत का वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात घटा है। इसकी वजह से 19 महीने में पहली बार सितंबर में निर्यात में गिरावट आ सकती है। अगस्त तक के विभिन्न स्रोतों से मिले आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के शीर्ष 50 निर्यात केंद्रों में से जुलाई और अगस्त में क्रमशः 19 और 17 देशों में निर्यात संकुचित हुआ है। इसके विपरीत जून महीने में शीर्ष 50 निर्यात केंद्रों में से सिर्फ 6 देशों में निर्यात घटा था।
चीन में आर्थिक मंदी और उसकी शून्य कोविड नीति के कारण भारत से चीन को होने वाले निर्यात में अप्रैल-अगस्त के दौरान 35.6 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले सप्ताह एसऐंडपी ने चीन के वृद्धि अनुमान को घटाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले 2022 में 3.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था।
अप्रैल-अगस्त के दौरान निर्यात में कमी वाले अन्य देशों में सिंगापुर (-22 प्रतिशत), हॉन्गकॉन्ग (-15.15 प्रतिशत), जापान (-6.8 प्रतिशत), वियतनाम (-19.7 प्रतिशत), पोलैंड (-5.2 प्रतिशत) और रूस (-24.4 प्रतिशत) शामिल हैं। अगस्त महीने में ही कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को होने वाला निर्यात कम होने लगा था, जिनमें ब्रिटेन (-3.35 प्रतिशत), सऊदी अरब (-10.7 प्रतिशत), जर्मनी (-4.4 प्रतिशत) और दक्षिण कोरिया (-16 प्रतिशत) शामिल हैं।
सोमवार को देर शाम जारी सितंबर के कारोबार संबंधी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात 3.5 प्रतिशत कम होकर 33.6 अरब डॉलर गया है, जबकि वाणिज्यिक वस्तुओं का आयात उल्लेखनीय रूप से 5.4 प्रतिशत बढ़कर 59.3 अरब डॉलर हो गया है। इसकी वजह से व्यापार घाटा 22.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। सितंबर महीने में गैर पेट्रोलियम निर्यात 7.25 प्रतिशत संकुचित होकर 26.5 अरब डॉलर हो गया है, जबकि गैर पेट्रोलियम आयात 10.7 प्रतिशत बढ़कर 43.75 अरब डॉलर हो गया है।
क्वांटइको रिसर्च ने एक नोट में कहा है कि भारत के निर्यात पर वैश्विक मांग में आई कमी का बुरा असर पड़ रहा है। वैश्विक आर्थिक स्थितियां लगातार कमजोर हो रही हैं और भूराजनीतिक अनिश्चितता बढ़ रही है। इसमें कहा गया है, ‘इससे (सितंबर में निर्यात में संकुचन) पता चलता है कि गति में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
साथ ही पिछले महीने की तुलना में भी 3.8 प्रतिशत संकुचन आया है। पिछले महीने की तुलना में लगातार तीसरे महीने में गिरावट दर्ज की गई है।’पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान भारत के वाणिज्यिक वस्तुओं का निर्यात 15.5 प्रतिशत बढ़कर 229 अरब डॉलर हो गया है जबकि आयात 37.9 प्रतिशत बढ़कर 378.5 अरब डॉलर हो गया है।
इस वजह से व्यापार घाटा 149.5 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है। सितंबर में इंजीनियरिंग सामान, कार्बनिक व अकार्बनिक रसायनों, फार्मास्यूटिकल्स, रेडीमेड गार्मेंट, सूती धागे और चावल का निर्यात कम हुआ है, जबकि पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न, इलेक्ट्रॉनिक और समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ा है।
इस माह के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोने, कीमती रत्न, रसायनों, खाद्य तेल का आयात घटा है, जबकि मशीनरी, ट्रांसपोर्ट उपकरण, कोयला, लोहा और स्टील का आयात बढ़ा है। विश्व व्यापार संगठन ने अपने हाल के गुड्स ट्रेड बैरोमीटर में वैश्विक व्यापार की वृद्धि में अस्थिरता का अनुमान लगाया है।
वैश्विक वाणिज्यिक व्यापार की मात्रा कम हुई है और 2022 की पहली तिमाही में इसमें 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 2021 की चौथी तिमाही के 5.7 प्रतिशत की तुलना में कम है। डब्ल्यूटीओ ने 2022 में वैश्विक वाणिज्यिक व्यापार में 3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है, जबकि 2021 में 9.8 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। इसमें कहा गया है कि यूक्रेन में टकराव, महंगाई के दबाव और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति में सख्ती के कारण वृद्धि के अनुमान को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है।