अर्थव्यवस्था

वित्त मंत्रालय ने संसद से 2.81 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च के लिए मांगी मंजूरी

वित्त मंत्रालय ने आर्थिक स्थिरता कोष और गोल्ड रिजर्व फंड सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड स्कीम, 2025 के लिए 59,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटन की मांग की है

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रुचिका चित्रवंशी   
Last Updated- March 10, 2026 | 10:09 PM IST

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की दूसरी अनुपूरक मांग के माध्यम से 2.81 लाख करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय के लिए संसद की मंजूरी मांगी है, जिसमें 2.01 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध नकद राशि शामिल है। सकल अतिरिक्त व्यय की भरपाई मंत्रालयों व विभागों के 80,145.71 करोड़ रुपये बचत या बढ़ी प्राप्तियों व रिकवरी से की जाएगी।

इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा,  ‘शुद्ध नकद राशि की भरपाई मंत्रालयों के बड़ी मात्रा में बचे धन से हो जाएगी।  वित्त वर्ष2026 के संशोधित अनुमान  को पूरा करने के लिए फरवरी-मार्च 2026 के दौरान सरकार के राजस्व व्यय को 30 प्रतिशत सालाना तक बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसके लिए 2.3 लाख करोड़ रुपये की बढ़ी राशि की आवश्यकता होगी। नतीजतन हमें इस खाते में कोई महत्त्वपूर्ण वित्तीय चूक की उम्मीद नहीं है।’

वित्त मंत्रालय ने आर्थिक स्थिरता कोष और गोल्ड रिजर्व फंड सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड स्कीम, 2025 के लिए 59,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आवंटन की मांग की है। अतिरिक्त व्यय में 15,000 करोड़ रुपये उर्वरक विभाग की पोषण पर आधारित सब्सिडी नीति और 23,640 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत डेवलपमेंट ऐक्शन प्लान के लिए सब्सिडी पर खर्च होंगे।

इंडियन डेवलपमेंट ऐंड इकनॉमिक असिस्टेंस स्कीम के तहत मिलने वाले ऋण पर ब्याज छूट की सब्सिडी के लिए वित्त मंत्रालय ने 3,788 करोड़ रुपये अतिरिक्त नकद राशि मांगी है।

संशोधित अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार का कुल व्यय 49.64 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से 10.96 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय है। सरकार ने 31 जनवरी, 2026 तक कुल व्यय का 74.3 प्रतिशत उपयोग कर लिया है।

लेखा महानियंत्रक के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में कुल पूंजीगत व्यय का 77 प्रतिशत खर्च किया गया है।

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2024 के आधार वर्ष में कम नॉमिनल जीडीपी के साथ यह अतिरिक्त पूरक वित्तीय गणित को थोड़ा मुश्किल बना सकता है, जब तक कि अन्य वस्तुओं पर व्यय में कटौती न हो या अतिरिक्त राजस्व सृजन न हो।’

First Published : March 10, 2026 | 10:09 PM IST