खाद्य एवं उर्वरक सब्सिडी का बोझ इस साल अधिक होने के बावजूद वित्त मंत्रालय के नीति निर्माताओं को भरोसा है कि वित्त वर्ष 2023 के लिए राजकोषीय घाटे में कमी आएगी अथवा वह 6.4 फीसदी नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लक्ष्य के करीब होगा।
अधिकारियों ने तीन कारणों से यह भरोसा जताया है। पहला, जबरदस्त अप्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष कर संग्रह। दूसरा, नॉमिनल अथवा मुद्रास्फीति-समायोजित जीडीपी में वृद्धि। तीसरा, एकल नोडल एजेंसी (एसएनए) डैशबोर्ड के जरिये व्यय में उल्लेखनीय बचत।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम इस साल एसएनए डैशबोर्ड के जरिये 40,000 से 50,000 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि केंद्र ने कुछ योजनाओं के लिए इस वर्ष अब तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के आवंटन को पहले ही रोक दिया है। केंद्र का कहना है कि राज्यों के खजाने में बराबर राशि उपलब्ध है और उन्हें पहले उसे खर्च करना चाहिए।
राज्यों को केंद्र प्रायोजित योजनाओं से संबंधित रकम के वितरण के लिए सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली में एसएनए नई लेखांकन व्यवस्था है। सीएसएस योजनाओं के लिए धन का इंतजाम केंद्र और राज्य मिलकर करते हैं। एसएनए डैशबोर्ड के जरिये अधिकारी केंद्रीय खजाने से मंत्रालयों के जरिये राज्य के खजानों, विभागों और सीधे विक्रेता, ठेकेदार या कार्यान्वयन एजेंसी को जारी रकम पर नजर रख सकते हैं।
एसएनए के तहत राज्यों के पास प्रत्येक योजना के लिए एक बैंक खाता होता है और योजना से संबंधित समूची रकम उसी खाते के जरिये आवंटित होती है। इसका मतलब साफ है कि केंद्र को लाखों खातों के बजाय करीब 3,000 खातों पर ही नजर रखनी पड़ती हैं। पिछले वित्त वर्ष के दौरान एसएनए के जरिये केंद्र ने करीब 10,000 करोड़ रुपये की बचत की थी।
अधिकारी ने कहा कि इस साल के आरंभ में व्यय विभाग द्वारा शुरू किए गए अभियान से बचत होगी। इसके तहत संबंधित मंत्रालयों को सब्सिडी योजनाओं और नरेगा जैसे प्रमुख कार्यक्रमों में अक्षमताओं की पहचान करने के लिए कहा गया है। हालांकि अधिकारी ने यह अनुमान जाहिर नहीं किया कि बचत कितनी हो सकती है।
एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘इस साल राजकोषीय घाटा लक्ष्य के करीब रह सकता है। राजस्व संग्रह काफी दमदार रहा है और मुद्रास्फीति के कारण नॉमिनल जीडीपी अनुमान से अधिक होगा। इसलिए मात्रा के लिहाज से लक्ष्य भले ही पार हो गया हो, लेकिन जीडीपी के प्रतिशत के तौर पर इसे समाहित किया जा सकता है।’ वित्त वर्ष 2023 के लिए राजकोषीय घाटे का बजट अनुमान 16.6 लाख करोड़ रु. है। साल 2022 के केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2023 के लिए 258 लाख करोड़ रु. के नॉमिनल जीडीपी का अनुमान जाहिर किया गया है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि अत्यधिक मुद्रास्फीति के कारण नॉमिनल जीडीपी 273 से 275 लाख करोड़ रुपये के दायरे में रहने के आसार हैं।
ऐसे में यदि मात्रात्मक लिहाज से राजकोषीय घाटा 1 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 17.6 लाख करोड़ रुपये होता है तो वह जीडीपी का करीब 6.4 फीसदी होगा। वित्त वर्ष 2023 में अप्रैल से अगस्त की अवधि में केंद्र का राजकोषीय घाटा 5.4 लाख करोड़ रुपये पर बजट अनुमान का 32.6 फीसदी रहा।
इस दौरान शुद्ध कर राजस्व 7 लाख करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 8.5 फीसदी अधिक है।इंडिया रेटिंग्स के प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि आगामी महीनों के दौरान राजस्व संग्रह दमदार बना रहेगा। ऐसे में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में तीन महीने के विस्तार, उर्वरक सब्सिडी में वृद्धि के कारण बजट का राजकोषीय अंकगणित बिगड़ने की आशंका नहीं है।’