facebookmetapixel
रेट कट का असर! बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारीTest Post कैश हुआ आउट ऑफ फैशन! अक्टूबर में UPI से हुआ अब तक का सबसे बड़ा लेनदेनChhattisgarh Liquor Scam: पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ED ने किया गिरफ्तारFD में निवेश का प्लान? इन 12 बैंकों में मिल रहा 8.5% तक ब्याज; जानिए जुलाई 2025 के नए TDS नियमबाबा रामदेव की कंपनी ने बाजार में मचाई हलचल, 7 दिन में 17% चढ़ा शेयर; मिल रहे हैं 2 फ्री शेयरIndian Hotels share: Q1 में 19% बढ़ा मुनाफा, शेयर 2% चढ़ा; निवेश को लेकर ब्रोकरेज की क्या है राय?Reliance ने होम अप्लायंसेस कंपनी Kelvinator को खरीदा, सौदे की रकम का खुलासा नहींITR Filing 2025: ऑनलाइन ITR-2 फॉर्म जारी, प्री-फिल्ड डेटा के साथ उपलब्ध; जानें कौन कर सकता है फाइलWipro Share Price: Q1 रिजल्ट से बाजार खुश, लेकिन ब्रोकरेज सतर्क; क्या Wipro में निवेश सही रहेगा?Air India Plane Crash: कैप्टन ने ही बंद की फ्यूल सप्लाई? वॉयस रिकॉर्डिंग से हुआ खुलासा

कारों की बिक्री में पांच सबसे अमीर राज्यों की हिस्सेदारी 38 फीसदी

Last Updated- December 11, 2022 | 2:05 PM IST

वित्त वर्ष 2022-23 की पहली छमाही में पंजीकृत 14 लाख कारों और स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहनों में से 5,40,000 वाहन पांच सबसे अमीर राज्यों दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा, तेलंगाना और गुजरात में थे। इनकी कुल हिस्सेदारी 37.8 फीसदी थी। पांच सबसे गरीब राज्यों ओडिशा, असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार की हिस्सेदारी 18.9 फीसदी थी, जो 2020-21 में 20.4 फीसदी के सर्वोच्च स्तर से नीचे थी।  
वाहन डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार पांच सबसे गरीब राज्यों की तुलना में पांच सबसे अमीर राज्यों में दोगुना यात्री वाहनों का पंजीकरण हुआ हैं जो वर्ष 2020-21 में 1.74 के अनुपात से काफी अधिक है। यह यात्री वाहनों की खपत में ‘के’ आकृति के सुधार को इंगित करता है। सुधार की ठीक वैसी ही प्रवृत्ति देखी जा रही है, जैसा कि औपचारिक नौकरियों (इस श्रृंखला के पहले भाग में शामिल) के क्षेत्र में देखी गई थी। 
सबसे अमीर और सबसे गरीब राज्यों की रैंकिंग प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर की जाती है, जो कि जनसंख्या से विभाजित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। उपभोग का अधिकतर भाग कारों और एसयूवी है। हालांकि अभी भी 54 फीसदी भारतीय परिवारों के पास स्कूटर हैं। लेकिन राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 के आंकड़ों के अनुसार यात्री वाहनों के मालिकाना हक में वृद्धि हुई है। वर्ष 2005-06 में 2.5 फीसदी परिवारों के पास चार पहिया गाड़ी थी जो वर्ष 2020-21 में बढ़कर 8 फीसदी हो गई है।  वाहन ऋण बकाया सभी व्यक्तिगत ऋणों का 12 फीसदी है। यह परिवारों में खपत बढ़ने की प्रवृत्ति के स्पष्ट संकेतक के रूप में देखा जा सकता है। यदि राज्यों के बीच खपत के रुझान अलग-अलग होते हैं, तो कुछ राज्यों को अन्य की तुलना में खपत आधारित सुधार का बड़ा लाभ मिलेगा।
यात्री वाहनों के पंजीकरण में सबसे अमीर राज्यों की हिस्सेदारी 31 मार्च, 2020 तक घट रही थी। सबसे गरीब राज्य महामारी के आने तक पकड़ बना रहे थे। वर्ष 2017-18 में यात्री वाहनों के पंजीकरण में पांच सबसे अमीर राज्यों की हिस्सेदारी 36.8 फीसदी थी। लेकिन 31 मार्च 2020 में इनकी हिस्सेदारी घटकर 35.5 फीसदी रह गई थी। मगर अमीर राज्य सुधार के चरण में पीछे हट गए हैं। 

First Published - October 5, 2022 | 9:21 PM IST

संबंधित पोस्ट